संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। हड़ताल खत्म होने के बाद सोमवार को जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ी। अस्पताल में ओपीडी की पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टरों के केबिन, सैंपल देने और दवा वितरण केंद्र तक मरीजों की भीड़ लगी रही। डॉक्टरों का सीट पर नहीं मिलना मरीजों का दर्द बढ़ा रहा है। डॉक्टर आएंगे भी या नहीं यह कोई बताने वाला नहीं है। मरीज बाहर बैठे रहते हैं और इंतजार करके लौट जाते हैं।
सोमवार दोपहर 12 बजकर 56 मिनट पर जिला नागरिक अस्पताल में कमरा नंबर 23 के बाहर मरीजों की अच्छी खासे मरीज बैठे थे। परंतु हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी सीट पर नहीं थे। मरीज बार-बार उनके केबिन में जाते और अंदर बैठे कर्मचारी से पूछते की डॉक्टर कब तक आएंगे। हर बार एक ही जवाब मिलता कि अभी डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर में हैं। इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता कि कब आएंगे।
इसी तरह दोपहर 12 बजकर 58 मिनट पर चमड़ी रोग विशेषज्ञ भी अपनी सीट पर नहीं थीं। उनके केबिन में लाइट जल रही थी, लेकिन कुर्सी खाली थी। यहां कोई दूसरा स्टाफ भी नहीं था। बाहर मर्जी बैठे हुए थे। उनके केबिन के बाहर लिखा हुआ था कि चमड़ी रोग विशेषज्ञ हर सोमवार व शुक्रवार को बैठती हैं। दोपहर में अस्पताल में वरिष्ठ नागरिकों के केबिन के बाहर भी ज्यादा भीड़ देखने को मिली।
यहां तैनात नर्स ने बताया कि बुजुर्गों में ज्यादातर उच्च रक्तचाप, शरीर में दर्द होने व सांस लेने में दिक्कत ज्यादा हो रही है। रोजाना 70 से 90 बुजुर्ग उनके पास आ रहे हैं। दोपहर में फिजिशियन के कमरे पर ताला लटका मिला। स्टाफ ने बताया कि वह कई दिनों से छुट्टी पर चल रहे हैं।
दोपहर 12 बजकर दो मिनट पर अस्पताल के प्रथम तल पर कमरा नंबर 104 के सामने लोगों की लंबी लाइन लगी मिली। यहां हालात ऐसे थे कि मनाेचिकित्सक डॉक्टर नवीन कुमार के केबिन में एक साथ पांच-छह मरीज जा रहे थे। यहां लोगों में पहले चेकअप कराने की होड़ देखी गई। भीड़ से बचने के लिए स्टाफ को बार-बार केबिन का दरवाजा बंद करना पड़ रहा था।
डॉ. नवीन ने बताया कि आज सोमवार है और दूसरा हड़ताल खत्म होने के बाद भी भीड़ बढ़ने का बड़ा कारण है। उनके पास रोजाना मनोरोग के 150 से 170 ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इसी तल पर दोपहर 12 बजकर पांच मिनट पर नेत्र रोग विशेषज्ञ भी सीट पर नहीं थे। उनके केबिन का दरवाजा बंद था और बाहर मरीज बैठे थे।
दरवाजा खोल कर देखा तो अंदर कुर्सी खाली मिली। मरीजों से बात की तो उन्होंने बताया कि काफी देर से बैठे हैं, लेकिन डॉक्टर यहां नहीं मिले। इसी तल के अगले हिस्से में दंत रोग विशेषज्ञ भी सीट पर नहीं थे। यहां बैठे स्टाफ ने बताया कि डॉक्टर कोर्ट में गए हैं।
ओपीडी के साथ ही अस्पताल में ऑपरेशन भी होते रहते हैं। इससे डॉक्टरों की ड्यूटी ओटी में लगी होती है। ऑपरेशन करने से पहले व बाद में डॉक्टर मरीजों का चेकअप करते है। इसके अलावा यदि कोई डॉक्टर बेवजह सीट छोड़ कर इधर-उधर जा रहा है तो उसकी जांच करवाई जाएगी। मरीजों उपचार पहली प्राथमिकता है। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।
जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक के केबिन के बाहर लगी लोगों की भीड़। संवाद
जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक के केबिन के बाहर लगी लोगों की भीड़। संवाद
जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक के केबिन के बाहर लगी लोगों की भीड़। संवाद
जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक के केबिन के बाहर लगी लोगों की भीड़। संवाद
जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक के केबिन के बाहर लगी लोगों की भीड़। संवाद