संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला नागरिक अस्पताल में काम करने वाले स्वास्थ्य ठेका कर्मचारियों का धरना जारी है। ठेका कर्मचारियों के काम न करने का सीधा असर स्वास्थ्य सुविधाओं पर पड़ रहा है। अस्पताल में पट्टी व प्लास्टर कराने के लिए भी मरीज भटक रहे हैं। मरीजों को कभी इमरजेंसी तो कभी प्लास्टर रूम में भेजा जा रहा है।
डॉक्टर व स्टाफ नर्स किसी मरीज को हाथ लगाने को तैयार नहीं है। यहां तक की लेबर रूम में भी काम प्रभावित हो रहा है। भर्ती मरीजों के बेड की न तो समय पर चादर बदली जा रही है और न ही मेडिकल वेस्ट की ठीक से साफ सफाई हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी काम छोड़ कर बैठे कर्मचारियों को अभी तक मनाने में विफल रहे हैं। कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
वहीं कोई दूसरी व्यवस्था भी अस्पताल की तरफ से नहीं की जा रही। कर्मचारी कब तक काम पर नहीं लौटेंगे इसके बारे में भी कोई तारीख निश्चित नहीं है। अस्पताल में दवा लेने आए पवन ने बताया कि उसकी पत्नी का थोड़े दिन पहले ऑपरेशन हुआ था। वह उसकी पट्टी कराने के लिए इमरजेंसी में गया था, लेकिन वहां से प्लास्टर रूम में भेज दिया गया।
प्लास्टर रूम में कोई कर्मचारी नहीं है, क्योंकि वह धरने पर बैठे हैं। हमीदा के अयूब ने बताया कि उसके बेटे की टांग पर प्लास्टर लगा हुआ है। वह शुक्रवार व शनिवार को भी आया था और सोमवार को भी आया है, लेकिन यहां प्लास्टर काटने वाला भी कोई नहीं है। यदि कर्मचारी धरने पर है तो उसकी जगह कोई दूसरा तो होना चाहिए।
एक दशक से दूसरे काम पर लगाए गए इन कर्मचारियों को अब हाथ में झाड़ू पकड़ कर साफ सफाई करने को कहा जा रहा है। कर्मचारियों से उनके मूल काम सफाई कार्य कराने के पीछे सिविल सर्जन व पीएमओ स्वास्थ्य विभाग के डीजी के आदेश होने की बात कह रहे हैं। डीजी के आदेश लागू करने में भी भेदभाव किया जा रहा है। आधे कर्मचारी कार्यालयों में बैठाया गया है और बाकी को झाड़ू लगाने के लिए कहा जा रहा है।
सभी जिलों में लागू किए जाएं आदेश : जिलाध्यक्ष
स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी यूनियन के जिलाध्यक्ष विजय कुमार का कहना है कि उन्हें बताया गया है कि जो कर्मचारी दूसरे काम कर रहे हैं, उन्हें वहां से हटाकर उनके मूल काम सफाई कार्य पर लगाया जाए। यदि यह डीजी के आदेश हैं तो इन्हें पूरे प्रदेश में लागू किया जाए। यह आदेश केवल यमुनानगर में ही लागू किए जा रहे हैं और वह भी केवल जिला अस्पताल में। अन्य किसी भी अस्पताल या जिले में कर्मचारियों को हटाकर उनसे मूल काम नहीं लिया जा रहा है। आदेशों को लागू करने में भेदभाव किया जा रहा है। जब तक उनकी मांग को माना नहीं जाता तब तक धरना जारी रहेगा।