संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 110 वें दिन महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने जीवन में संयम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए फरमाया कि संयम से किया गया कार्य सफलता की ओर ले जाता है और सही गलत की पहचान भी करवा देता है। यहीं से जीवन के मूल्य में संयम की उपयोगिता सिद्ध होती है।
उन्होंने कहा कि संयम के भी अपने फार्मूले होते हैं जिससे संयम को प्राप्त किया जाता है। संयम की परिभाषा स्पष्ट है। शांत रहते हुए अपने मुकाम तक पहुंचना है। सही मायने में यदि हम अपनी इंद्रियों पर काबू पा लेते हैं तो हमने सब पा लिया। संयम ही एक ऐसा मार्ग है जिससे हम उत्कृष्ट जीवन, महानता और सुख-शांति पा सकते हैं।
यदि किसी से झगड़ते समय हमने अपने आप पर संयम रख बात वहीं समाप्त कर दी तो हमने धैर्य, विवेक, विनम्रता, अपनी सहजता सरलता, बुद्धि व्यवहार सभी गुणों को भी ध्यान में रखा (ये गुण है तो संयम है) यहां हम अपनी इंद्रिय जिह्वा को बस में कर लेते हैं तो बाकी इंद्रियों को भी तथाकथित सभी गुणों के साथ संयमित रख सकते हैं और संयम में विश्वास की भावना प्रचुर वेग में हो तो सोने पे सुहागा।
डॉ. स्वाति ने कहा कि संयम रखना कोई खेल नहीं है। कठिन परिस्थिति में ही अपने आप में संयम रखना यानि की अपने आपसे विजय हासिल करना होता है। जिसने अपनी इंद्रियों पर विजय हासिल कर ली वह कठिन परिस्थिति में भी संयम रखता है एवं बड़े से बड़ा कार्य करने में सक्षम होता है और हमारा जैन धर्म तो अहिंसा और संयम का जीता जागता उदाहरण है।