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Yamuna Nagar News: आरक्षण के बाद भी ट्रेनों में चढ़ने के लिए जूझ रहे यात्री

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 ट्रेन के कोच का दरवाजे खुलवाते आरपीएफ कर्मी व लगी यात्रियों की भीड़। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। दिवाली और छठ पर्व पर घर जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंच रहे यात्रियों के लिए सफर किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाली ट्रेनें यात्रियों से खचाखच भरी हुई हैं। आरक्षण कराने के बावजूद यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने के लिए जूझना पड़ रहा है। कोच के अंदर बैठे यात्री दरवाजे तक नहीं खोल रहे हैं।
ट्रेन छूटने के बाद यात्रियों को अगली गाड़ी का इंतजार करने के लिए घंटों स्टेशन पर रुकना पड़ रहा है। रात से सुबह हो रही है लेकिन भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही। इस बीच रात को गिरता तापमान यात्रियों की परेशानी और बढ़ा रहा है। जिले में रात का तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और खुले प्लेटफार्म पर इंतजार कर रहे यात्रियों की कंपकंपी छूट रही है।
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आरपीएफ कंपनी कमांडर मोहित त्यागी ने बताया कि त्योहार के कारण भारी भीड़ है। लोग बिल्कुल भी संयम नहीं करते हैं, जिससे ज्यादा परेशानी होती है। आरपीएफ लगातार ट्रेनों के दरवाजे खुलवाकर यात्रियों को ट्रेनों में चढ़ा रही है। थाना प्रभारी राजकीय रेलवे पुलिस के सत्य प्रकाश ने बताया कि जीआरपी यात्रियों को ट्रेनों में चढ़ाने के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी संभाल रही है।
आरपीएफ-जीआरपी को करनी पड़ रही मशक्कत
यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन पर लगभग सभी ट्रेनों का ठहराव महज दो मिनट का है। ऐसे में ट्रेन के दरवाजे बंद मिलने पर यात्रियों के पास चढ़ने के लिए बहुत कम समय बचता है। शनिवार दोपहर करीब सवा 12 बजे स्टेशन पर पहुंची जनसेवा एक्सप्रेस में चढ़ने के लिए यात्रियों में मारामारी मच गई। कई कोच के दरवाजे बंद थे। आरपीएफ और जीआरपी के जवानों ने मशक्कत कर कुछ बोगियों के दरवाजे खुलवाए और यात्रियों को ट्रेन में चढ़ाया। प्लेटफार्म पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को भीड़ नियंत्रित करने में काफी परेशानी हुई।
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ट्रेन छूटने से हो रहा आर्थिक नुकसान
सबसे ज्यादा परेशानी आरक्षित बोगियों में सफर करने वाले यात्रियों को हो रही है। सीट आरक्षित होने के बावजूद भीड़ के कारण वे अपनी बोगी तक नहीं पहुंच पा रहे। ट्रेन छूटने से उनकी टिकट का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। मजबूरी में कई यात्री सामान्य बोगियों में सफर करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन वहां भी पैर रखने तक की जगह नहीं है।
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