जगाधरी। गर्मी की छुट्टियों के चलते इन दिनों सभी रूट की ट्रेनों में काफी भीड़ चल रही है। हालात ऐसे हैं कि ट्रेन के डिब्बों में घुसने के लिए जगह तक नहीं है। ऐसे में यात्रियों को ट्रेन पड़कने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। चूंकि भीड़ के कारण यात्री प्लेटफार्म के बजाय आउटसाइड से ट्रेन में चढ़ रहे हैं। ऐसी लापरवाही से हादसे होते हैं।
जानाकारी के अनुसार गर्मियों की छुट्टियों के कारण इन दिनों यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली अधिकतर गाड़ियों में भीड़ है। जिला औद्योगिक नगरी में विभिन्न राज्यों के लोग काम करते हैं। यह लोग त्योहार, शादी व गर्मियों की छुट्टियों में ही अपने पैतृक घर जाते हैं। यही कारण है कि इन दिनों में पूर्वोत्तर भारत सहित अन्य राज्यों में जाने वाली तमाम गाड़ियों में सीट नहीं मिल रही है। स्टेशन आने से पहले यात्री प्लेटफार्म की तरफ का गेट बंद कर देते हैं, चूंकि और यात्री चढ़ने से भीड़ बढ़ जाती है। प्लेटफार्म की साइड यात्रियों को ट्रेनों के दरवाजे बंद मिलते हैं। जिस कारण यात्री आउटसाइड से ट्रेन में चढ़ने को मजबूर हैं। यही हाल मंगलवार रात को भी स्टेशन पर देखने को मिली। रात करीब 12 बजे आई गाड़ी संख्या 13006 हावड़ा मेल में काफी भीड़ थी। आरक्षित बोगियों में चढ़ने वाले यात्री इधर से उधर भागते रहे। जबकि सामान्य कोच में चढ़ने के लिए लोगों को धक्का मुक्की करनी पड़ी। जबकि सामान्य बोगी में चढ़ने के लिए यात्री आउट साइड पर खड़े हो गए। दो मिनट के लिए रुकी ट्रेन में पत्थरों के ऊपर से ट्रेन में चढ़ने के लिए लोगों को मशक्कत करनी पड़ी। ट्रेन चलने पर कुछ यात्रियाें ने दौड़ कर ट्रेन पकड़ी। यह सब नजारा देर रात ठीक आरपीएफ और जीआरपी थाने के सामने देखने मिला। किसी ने यात्रियों को ऐसा करने से नहीं रोका। यदि प्लेटफार्म नंबर एक भी ट्रेन आनी होती तो यह लापरवाही बेहद गंभीर हो सकती थी। इस दौरान कुछ यात्रियों से ऐसा करने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि ट्रेनों के डिब्बे बंद होते हैं। प्लेटफार्म से चढ़ नहीं पाते हैं। गर्मी के कारण यात्री आउट साइड का दरवाजा खुला रखते हैं। ऐसे में इधर से ट्रेन में चढ़ना आसान होता है। संवाद
-
वर्जन
इसके लिए आरपीएफ की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाता है। लोगों को लाइन क्रॉसिंग सहित सुरक्षित सफर के तरीकों की जानकारी दी जाती है। फिर भी यदि आउटसाइड से ट्रेन में चढ़ रहे हैं तो इसकी निगरानी की जाएगी। यात्रियों को समझाया जाएगा। आवश्यकता होगी तो चालान भी किया जाएगा।
मोहित त्यागी, कंपनी कमांडर, आरपीएफ।