यमुनानगर। शिक्षा निदेशालय की ओर से जिले के 58 निजी स्कूलों में ली जा रही फीस और शुल्क की जांच के आदेश दिए हैं। निदेशालय के बाद जिला शिक्षा सदन की ओर से इसके लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। स्कूलों पर कार्रवाई का दबाव बनाने के लिए बुधवार को अभिभावक सेवा मंच का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा निदेशक से मिला। निजी स्कूलों के प्रतिनिधिमंडल में छह अभिभावक शामिल रहे। जिसका नेतृत्व मंच के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील वैद्य व सचिव दीपक कपूर ने किया। इस दौरान अभिभावकों ने निदेशक को अपनी समस्याओं व स्कूलों की मनमानी के बारे बताया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का कहना था कि उन्होंने विभागीय से लेकर आला अधिकारियों तक 75 से ज्यादा शिकायतें दी, लेकिन निजी स्कूलों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अभिभावक संदीप व शालू सेठी ने निदेशक को बताया कि करीब एक साल से निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावक मंडलायुक्त रेणु एस फुलिया, डीसी पार्थ गुप्ता सहित अन्य अधिकारियों से मिल चुके हैं। इस बारे में 75 से ज्यादा शिकायतें भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। फार्म छह में घोषित से ज्यादा फीस, हर कक्षा में प्रवेश पर वार्षिक व विकास शुल्क, भवन फंड सहित विभिन्न चार्ज की वसूली की जा रही है। इसके लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है। विरोध करने पर बच्चों को प्रताड़ित किया जाता है। उन्हें कक्षा से बाहर या लाइब्रेरी में खडा किया जाता है। स्कूल निर्धारित निजी प्रकाशक की किताबें, स्कूल के नाम छपी नोट बुक्स न लेने पर बच्चों को क्लास टेस्ट में बैठने नहीं देते हैं। किताबों, वर्दियों, स्टेशनरी के नाम पर स्कूलों ने लूट मचाई हुई है। अभिभावकों ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे पहले जिले के तीन स्कूलों के खिलाफ जांच हुई और अभिभावकों के आरोप सही मिले। इसके बावजूद इन स्कूलों पर कार्रवाई नहीं की गई। वहीं अन्य पदाधिकारी अमित मलिक, सुमन लता, रोहित ने बताया कि स्कूल साल में दो तीन बार वर्दी बदलता है और अब सप्ताह में तीन दिन अलग-अलग वर्दी पहनाने का नियम है। यह सब निर्धारित दुकान से खरीदने को मजबूर किया जाता है। निदेशक ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।