जिला परिषद में चुनावों में बहुजन समाज पार्टी का दबदबा रहा। बसपा के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरे छह उम्मीदवारों ने जीत का परचम फहराया। वहीं, एक अन्य प्रत्याशी बसपा समर्थित बताई जा रही है। भाजपा के चार प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। कांग्रेस व इनेलो समर्थित दो-दो उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। जबकि तीन आजाद उम्मीदवारों चुनाव जीतने में सफल रहे।
जिला परिषद के चुनाव बसपा के लिए सुखद साबित हुए हैं। इस चुनाव में केवल बसपा ने ही अपने सिंबल पर चुनाव लड़ा और उसी के सबसे अधिक उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। जिला परिषद के 18 वार्डों में से वार्ड नंबर छह, सात, नौ, 10, 12, 14 व 15 से बसपा उम्मीदवार चुनाव जीते।
वहीं वार्ड नंबर 12 की महिला उम्मीदवार मनीषा वालिया के लिए बसपा के पूर्व विधायक व पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष अकरम खान ने चुनाव प्रचार किया था। इस तरह जिला परिषद में बहुजन समाज पहले पायदान पर है। वहीं वार्ड नंबर एक, आठ, 11 व 16 से भाजपा समर्थित उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। जबकि वार्ड नंबर पांच व 13 से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जिप सदस्य बनने में कामयाब रहे। इसी प्रकार वार्ड नंबर दो व 18 से इनेलो समर्थित प्रत्याशी जीते हैं। वार्ड नंबर तीन, चार व 17 से आजाद उम्मीदवारों ने चुनाव जीता है।
विधानसभा अध्यक्ष पर भारी पड़े पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष
यमुनानगर। जिप चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण छछरौली क्षेत्र के चार में से तीन वार्डों में बसपा प्रत्याशियों ने जीत का परचम फहराया, जबकि भाजपा का एक उम्मीदवार ही चुनाव जीत सका। इस क्षेत्र मेें राजनीति के दो धुुंरधरों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष अकरम खान दोनों ही छछरौली क्षेत्र के रहने वाले हैं। दोनों ने ही अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में जमकर चुनाव प्रचार किया था। छछरौली के वार्ड नंबर छह में बसपा के पूर्व विधायक व पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष अकरम खान के भाई शमीम खान ने सबसे अधिक 8648 वोटों के अंतर से चुनाव जीता, जो जिप चुनाव में सबसे बड़ी जीत है। इसके अलावा वार्ड नंबर सात, नौ व 10 से बसपा उम्मीदवार जीते हैं। जबकि वार्ड नंबर आठ से भाजपा समर्थित उम्मीदवार ने जीत हासिल की है।
गौरतलब है कि डेढ़ दशक पहले तक विधानसभा सीट रह चुका छछरौली पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष व पूर्व बसपा विधायक अकरम खान के परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। यहां से उनके दादा अब्दुल राशिद व पिता असलम खान विधायक रह चुके हैं। खुद अकरम खान भी दो बार विधायक बन चुके हैं। अकरम खान के बसपा में शामिल होने के बाद इस क्षेत्र में अकरम खान की स्थिति और भी मजबूत हो गई थी। परिसीमन के बाद वर्ष 2009 में हुए विस चुनाव में छछरौली सीट को समाप्त कर इसके क्षेत्र को जगाधरी सीट से मिला दिया गया। अकरम खान ने वर्ष 2009 में बसपा उम्मीदवार के तौर पर इस सीट से चुनाव लड़ा और भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की। लेकिन वर्ष 2015 में हुए विस चुनाव में भाजपा ने बसपा उम्मीदवार अकरम खान को पटखनी दे दी। हालांकि छछरौली क्षेत्र में बसपा उम्मीदवार अकरम खान के पक्ष में भारी मतदान हुआ था। जिला परिषद चुनाव में छछरौली क्षेत्र से बसपा उम्मीदवारों की जीत ने यहां के वोटरों पर उनकी पकड़ साबित हो गई है। वहीं इस नतीजों से भाजपा का चिंतित होना लाजिमी है।
इनेलो के किले में भी लगी सेंध
इनेलो के लिए भी यह चुनाव दुखद रहा है। इनेलो को अपने ही गढ़ में हार का मुंह देखना पड़ा है। रादौर क्षेत्र में लंबे समय से इनेलो का दबदबा रहा है। रादौर विधानसभा सीट पर इनेलो प्रत्याशी लगातार चार बार चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि वर्ष 2015 में हुए विस चुनाव में यहां भाजपा उम्मीदवार श्याम सिंह राणा ने जीत हासिल की थी। इसके बावजूद रादौर क्षेत्र में इनेलो समर्थकों की खासी तादात है। जिप चुनावों में एक भी इनेलो प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका। वार्ड नंबर 11 में इनेलो प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा और केवल 31 वोटों के अंतर से चुनाव हारा। वहीं वार्ड नंबर 12 व 13 में इनेलो उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहे हैं।