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अंगूठा छाप को झटका, शिक्षितों को मौका

Wed, 12 Aug 2015 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर
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प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत चुनाव के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने और बैंकों व बिजली निगम के डिफाल्टरों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से पंचायत चुनाव की पूरी तस्वीर ही बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे कई गांवों में चुनाव के लिए प्रत्याशी न मिलने की स्थिति भी बन सकती है।
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राजनीति के जानकारों का मानना है कि बेशक इससे राजनीति में पढ़े-लिखे युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी, लेकिन राजनीति में अनुभव की कमी नजर आएगी।  

जिला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मुताबिक इस बार जिले में 474 ग्राम पंचायतों में चुनाव होने हैं। बीते महीने भंग की गई ग्राम पंचायतों में आधे से अधिक पर अनपढ़ सरपंच थे। वहीं इस बार सरपंच चुनाव लड़ने के लिए बड़ी संख्या में अनपढ़ भी तैयारी में जुटे हुए थे।

सरकार के निर्णय से इन्हें करारा झटका लगा है। पंचायत चुनाव के जानकारों की मानें तो यह चुनाव अशिक्षित लोगों का का ही माना जाता है। सरकार के फैसले से चुनाव लड़ने के लिए योग्य उम्मीदवारों का टोटा हो जाएगा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली निगम के 46 हजार डिफाल्टर
बिजली निगम के मुताबिक जिले में करीब एक लाख डिफाल्टर है, जिन पर बिजली निगम का करीब 80 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में डोमेस्टिक कनेक्शन के करीब 32 हजार और ट्यूबवेल कनेक्शन के करीब 13900 डिफाल्टर हैं। डोमेस्टिक डिफाल्टरों पर करीब 20 करोड़ रुपये और ट्यूबवेल के डिफाल्टरों पर करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये बकाया है। बिजली निगम डिफाल्टरों के ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने पर लगाई गई रोक से बिजली निगम को जल्द रिकवरी होने की उम्मीद है। बिजली निगम के सुपरिंटेंडिंग  इंजीनियर एसची शर्मा का कहना है कि सरकार के इस फैसले से चुनाव लड़ने के इच्छुक डिफाल्टर जल्द से जल्द बिजली निगम के बकाये का भुगतान कर देंगे।

जाटावाला में अधिकतर अशिक्षित
सरपंच के लिए शैक्षिक योग्यता दसवीं पास होने की अनिवार्यता से सबसे अधिक छछरौली खंड प्रभावित होगा। खंड में दर्जनों ग्राम पंचायत सरपंच अनपढ़ हैं। वहीं अधिकतर ग्राम पंचायतों में दसवीं पास व्यक्तियों की संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक है। खंड की ग्राम पंचायत जाटावाला इसका उदाहरण है। पिछले चुनाव में जाटावाला सीपियावाला ग्राम पंचायत में शामिल था, लेकिन इस बार जाटावाला की अलग ग्राम पंचायत बना दी गई है। सीपियावाला ग्राम पंचायत के निवर्तमान सरपंच आबिद हैं जो जाटावाला गांव के रहने वाले हैं। आबिद खुद अनपढ़ हैं। आबिद ने बताया कि गांव की आबादी करीब 1500 और वोटर करीब 800 हैं। भंग की गई ग्राम पंचायत में सभी आठ पंच अनपढ़ थे। मुस्लिम बाहुल्य इस गांव में करीब छह साल पहले सरकारी स्कूल खुला था, जो आठवीं तक है। गांव में लगभग सभी आदमी और बुजुर्ग अशिक्षित हैं। गांव के दस से भी कम बच्चे दसवीं पास हैं, जिनमें अधिकतर की उम्र 17 वर्ष या उससे कम है। ऐसे में जाटावाला ग्राम पंचायत चुनाव में सरपंच लड़ने का उम्मीदवार मिलना लगभग असंभव ही है। आबिद का कहना है कि यदि सरकार ने इस नियम में बदलाव नहीं किया तो उनके गांव से कोई सरपंच नहीं बन पाएगा।

सांगीपुर में बनेगा युवा सरपंच
रादौर खंड के सांगीपुर गांव में इस बार युवा सरपंच बनने की उम्मीद जगी है। सरपंच पद का चुनाव लड़ने के लिए जिन 4-5 व्यक्तियों ने मन बनाया है, उनमें सभी अनपढ़ हैं। गांव के निवर्तमान सरपंच ईश्वर सिंह का कहना है कि गांव में 40 साल से अधिक उम्र के दसवीं पास करने वाले इक्का-दुक्का ही हैं जो युवा दसवीं पास है, उनकी उम्र 30 साल से कम है। ये युवा नौकरी या खेतीबाड़ी कर रहे हैं। वहीं कुछ युवा गांव में ही अपना रोजगार चला रहे हैं। सरपंच चुनाव के लिए दसवीं पास की अनिवार्यता से इन युवाओं में पंचायत चुनाव के प्रति दिलचस्पी होना लाजमी है। सरकार के इस निर्णय का पता चलते ही युवाओं में यह चर्चा का विषय बन गया है।

खिजराबाद में 95 प्रतिशत शिक्षित, युवाओं ने फैसले को सराहा
चुनाव लड़ने के लिए दसवीं पास होने की अनिवार्यता का  खिजराबाद में कोई विरोध नहीं हो रहा है। पिछले प्लान में सरपंच रहे रामगोपाल भी दसवीं पास हैं। वहीं लगभग सभी पंच भी पढे-लिखे हैं। ग्राम पंचायत में लगभग 95 प्रतिशत लोग पढ़े-लिखे हैं। कुछ युवा खेतीबाड़ी और दुकान चला रहे हैं। गांव के युवा बिट्टू गुर्जर, गीता राम कश्यप, विक्की शर्मा, सोनी सरदार का कहना है कि पंचायत चुनाव में दसवीं पास होने की अनिवार्यता सरकार का अच्छा निर्णय है। इससे ग्राम पंचायत में पढ़े-लिखे व्यक्तियों की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही युवाओं को भी ग्रामीण राजनीति में भागीदारी का मौका मिलेगा।

पंचायत चुनाव में पढ़े-लिखे से अधिक रड़े हुए लोगों की जरूरत है। सरकार के इस निर्णय से अनपढ़ चुनाव लड़ने के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो जाएंगे।
कर्मवीर खुर्दबन, निवर्तमान सरपंच खुर्दबन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को हाईटेक इंडिया बनाना चाहते हैं। राजनीति में पढ़े-लिखे की भागीदारी होने से राजनीति में भी सुधार आएगा और युवाओं को भी कुछ करने का मौका मिलेगा।
घनश्याम दास अरोड़ा, यमुनानगर विधायक

पंचायत चुनाव में दसवीं पास की अनिवार्यता का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। यह चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात है। देश की संसद में कई सांसद अनपढ़ हैं। वहीं विधानसभा में भी कई विधायक अनपढ़ हैं। सरकार को पहले यहां सुधार करना चाहिए।
डॉ. बीएल सैनी, इनेलो के जिला प्रधान व पूर्व विधायक, रादौर

प्रजातंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीति के अनुभवी ही पंचायत चुनाव लड़ते आए हैं। सरकार के इस निर्णय से राजनीति में अनुभवहीन ही प्रतिनिधि बनेंगे। इसका खामियाजा लोगों को भुगतान पड़ेगा।
राजपाल भूखड़ी, पूर्व कांग्रेस विधायक, साढौरा

युवाओं के साथ-साथ राजनीति में अनुभव भी जरूरी
सरकार के इस निर्णय से बेशक ग्राम सभाओं में पढ़े-लिखों और युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी। लेकिन गांवों की राजनीति में अनभुवी जन प्रतिनिधि का होना भी जरूरी है। क्योंकि वे गांवों की समस्याओं और जरूरतों के बारे में अच्छी तरह जानते हैं।
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डॉ. एससी यादव
पोलिटिकल साइंस के प्रोफेसर, गुरुनानक खालसा कॉलेज
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