रादौर। गिरते भूमि जल स्तर को बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने ब्लॉक रादौर की पंचायतों की भूमि पर धान की रौपाई करने पर रोक लगा दी है।जिसके बाद अब रादौर ब्लॉक में पंचायत की भूमि को ठेके पर लेने वाला व्यक्ति उसमे धान की रौपाई नहीं कर सकेगा। विकास एवं पंचायत विभाग हरियाणा के प्रधान सचिव द्वारा प्रदेश के 7 जिलों के अलग अलग ब्लॉकों में पंचायत की भूमि पर धान की खेती क रने पर पुरी तरह से रोक लगाने के जिला उपायुक्तों, डीडीपीओ व बीडीपीओ के नाम पत्र जारी कर सरकार के फैसले से अवगत कराया है। जिनमे जिला यमुनानगर का ब्लॉक रादौर भी शामिल है। सरकार के इस फैसले का ब्लॉक सरपंच एसोसिएशन की ओर से जोरदार विरोध किया गया है। एसोसिएशन की ओर से इस फैसले को सरकार से वापिस लेने की मांग की गई है। एसोसिएशन की ओर से प्रधान राणा धर्मपाल व महासचिव कर्मसिंह ने बताया कि ब्लॉक रादौर की पंचायतों को हर वर्ष पंचायती भूमि ठेके पर देने से अच्छी आमदन होती है। लेकिन, प्रदेश सरकार ने ब्लॉक रादौर की पंचायतों की भूमि पर धान की खेती करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिसके बाद अब ब्लॉक की पंचायतों की आमदन पर भारी असर पड़ेगा। पंचायती भूमि पर धान की खेती करने के चलते ही पंचायतों को लाखों रुपए की आमदन होती हैं। जो अब काफी कम हो जायेगी। आमतौर पर पंचायती भूमि 45 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ हर वर्ष ठेके पर जाती रही है। लेकिन सरकार द्वारा पंचायती भूमि पर धान की खेती करने पर रोक लगाने से पंचायती भूमि का ठेका आधे से भी कम रह जायेगा। बॉक्स दो वर्ष तक नही मिलेगी ग्रांट कोरोना वायरस की बीमारी के प्रकोप के चलते सरकार ने 2 वर्ष के लिए ग्रांट राशि जारी करने पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है। जिससे अब पंचायती कार्यो के लिए ग्रांट राशि घटने से विकास कार्यो पर दोहरी मार पड़ेगी। ब्लॉक के सरपंचों ने सरकार से मांग की है कि सरकार ब्लॉक रादौर में पंचायती भुमि पर धान की खेती करने पर लगाई गई रोक तुरंत वापिस ले। जिससे पंचायत के विकास कार्यो पर कोई प्रभाव न पड़े।