व्यासपुर। धान खरीद के दौरान हो रही बारिश के कारण राइस मिलर्स को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से धान की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही उसके रखरखाव और भंडारण में भी परेशानी बढ़ गई हैं। ऐसे में राइस मिलर्स ने प्रदेश सरकार से राहत देने की मांग उठाई है। मिलर्स का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए धान में क्षतिग्रस्त व बदरंग चावल की मात्रा देनों कम हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा राइस मिलर्स से प्रति क्विवंटल 67 प्रतिशत चावल लिया जाता है, पूर्व की सरकार के निर्णय के अनुसार मौजूदा परिस्थाितयों को देखते हुए इसे घटाकर 64 प्रतिशत किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
राइस मिलर्स जिला प्रधान मनीष बंसल ने कहा कि धान खरीद के समय बारिश होने से धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। इसके चलते मिलर्स को निर्धारित मानकों के अनुसार धान का रखरखाव करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि धान में क्षतिग्रस्त चावल को तीन से बढ़ाकर साढ़े चार प्रतिशत व बदरंग चावल की मात्रा भी तीन से बढ़ा कर साढ़े चार प्रतिशत की जाए। मौसम की अनिश्चितता के चलते धान की गुणवत्ता में बदलाव आ सकता है, जिसका असर राइस मिलर्स की मिलिंग प्रक्रिया व मिलर्स के कामकाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि क्षतिपूर्ति और बदरंग धान की सीमा में उचित बढ़ोतरी होने से मिलर्स को राहत मिलेगी और धान खरीद प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी। पिछले सीजन में पूरे जिले में 182 राइस मिलर्स ने रजिस्ट्रेशन करवा कार्य शुरू किया था, लेकिन सरकार की नीतियों के चलते इस वर्ष यह संख्या घटकर 130 रह गई है। आगामी समय में यह संख्या ओर कम हो सकती है। केंद्र सरकार को चाहिए कि राइस मिलर्स की नियमों में बदलाव मिलर्स की एसोसिएशन से सुझाव लेकर किए जाए। राइस मिलर्स ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं को देखते हुए जल्द उचित निर्णय लिया जाए, ताकि बारिश के कारण होने वाली परेशानियों और संभावित आर्थिक नुकसान से बचाव हो सके। संवाद