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Yamuna Nagar News: दूसरे राज्यों का धान सरकारी बताकर राइस मिलों में की जा रही आपूर्ति

Fri, 31 Oct 2025 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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किसानों की ओर से कलानौर बॉर्डर पर पकड़े गए धान से भरे वाहन। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। राइस मिलर दूसरे राज्यों से सस्ता धान खरीद रहे हैं। फिर इसी धान को सरकारी रिकॉर्ड में नंबर एक यानि वैध बनाकर अपनी राइस मिलों में पहुंचा रहे हैं। इस तरह पहले सस्ता खरीदा गया धान मंडियों में महंगा बेच कर मोटा मुनाफा कमाया गया और फिर वही सीएमआर स्कीम के तहत अपनी राइस मिलों में मंगवा लिया।
इतना ही नहीं दूसरे राज्यों से सस्ती दर पर भी चावल मंगवाया जा रहा है। जो धान सरकार से लिया गया है उसकी कुटाई न करके दूसरे राज्यों का चावल सीधे एफसीआई के गोदामों में डिलीवर किया जा रहा है। ऐसे में दूसरे राज्यों से धान व चावल मंगवा कर बड़े स्तर पर गोलमाल हो रहा है। किसानों द्वारा न केवल उत्तर प्रदेश-यमुनानगर के बॉर्डर पर बल्कि जिले के अंदर सड़कों पर भी धान व चावल से भरे ट्रक बड़ी संख्या में पकड़े जा रहे हैं।
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बॉर्डर पर धान व चावल के ट्रक किसानों द्वारा कई दिनों से रोके जा रहे हैं। इस दौरान कई चालकों से वाहनों के बिल लेकर उनकी जांच भी की गई। जो बिल चालकों से बरामद हुए हैं उसके अनुसार बिहार से धान 2075 रुपये प्रति क्विंटल खरीद कर राइस मिलों में मंगवाया जा रहा है। इसी तरह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से धान 2040 रुपये क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। वहीं उत्तराखंड से चावल 3311 रुपये क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है।
जिले के अधिकतर राइस मिलरों की अनाज मंडियों में आढ़त की दुकानें हैं। इससे उन्हें पता है कि बाहर से धान मंगवा कर उसे मंडियों में कैसे नंबर एक का करना है। राइस मिलर बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश या जम्मू से जो सस्ता धान मंगवाते हैं उसे अपने चहेते किसानों या रिश्तेदारों के खातों में चढ़ा दिया जाता है। फिर वही किसान या रिश्तेदार उस धान को मंडी में बेचने ले जाते हैं। जहां पर उनका गेट पास तक काटा जाता है।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दिए गए ब्योरा से डाटा मिलान होते ही धान मंडी में आढ़ती के पास भेजा जाता है। यह धान उसी आढ़ती के पास जाता है जो खुद राइस मिलर है या फिर जो आढ़ती उनके साथ मिला हुआ है। आढ़ती उस धान का जे-फार्म काट कर खरीद एजेंसी से सरकारी रेट पर 2389 रुपये के हिसाब से अपनी पेमेंट मंगवा लेता है। यानि 2040 रुपये में खरीदा गया धान सरकार को 2389 रुपये में बेचा जा रहा है। फिर यही धान सीएमआर स्कीम के तहत मंडी से उसी राइस मिलर की मिल में पहुंच जाता है।
मामले की कराई जाए जांच : संजू गुंदियाना

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना व निदेशक मंदीप सिंह रोड छप्पर का कहना है कि दूसरे राज्यों से बड़े स्तर पर धान व चावल आ रहा है। अब तक वह एक हजार से अधिक वाहनों को बॉर्डर से पकड़ चुके हैं। हैरानी की बात तो यह है कि खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने अभी तक इसे लेकर कोई जांच नहीं की। उन्हें पता है कि जांच होगी भी नहीं। यदि जांच की तो बाहरी राज्यों का धान खरीदने पर सीधे तौर पर सरकार पर सवाल उठेंगे। यह बहुत बड़ा घोटाला है। राइस मिलर और आढ़तियों का यह खेल अधिकारियों की मिलीभगत के बिना नहीं चल सकता।
राइस मिलरों के पास ट्रेडिंग का भी लाइसेंस है। यदि बिल पर माल आ रहा है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। यदि कोई बिना बिल के गलत तरीके से धान मंगवा कर बेच रहा है तो विभाग जांच करके कार्रवाई करे। -मनीष बंसल, जिलाध्यक्ष, जिला राइस मिलर्स एंड डीलर एसोसिएशन।
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दूसरे राज्यों का धान मंडियों में नहीं बिक रहा है। राइस मिलरों को भी कहा गया है कि यदि वह ट्रेडिंग के लिए दूसरे राज्यों से चावल मंगवा रहे हैं तो उसका स्टॉक अलग से रखें, जिससे उसका रिकॉर्ड जांचने में कोई दिक्कत न हो। बॉर्डर से भी चावल या धान के ट्रकों को जिले में नहीं आने दिया जा रहा। नाके पर विभाग के कर्मचारी तैनात हैं। - जतिन मित्तल, डीएफएससी, यमुनानगर।
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