संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। हरियाणा के स्टांप विक्रेताओं ने स्टांप पेपर बिक्री का कार्य निजी कंपनी को सौंपने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को चंडीगढ़ में ज्ञापन सौंपा। विक्रेताओं ने इसे अपनी आजीविका के लिए बड़ा खतरा बताते हुए सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है।
ऑल हरियाणा स्टांप वेंडर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष चंद्र शर्मा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड को इस प्रक्रिया में शामिल करने की योजना पर कड़ा एतराज जताया। एसोसिएशन का कहना है कि ई-स्टांपिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने और निजी कंपनी की भागीदारी से पारंपरिक स्टांप विक्रेताओं का काम पूरी तरह खत्म हो सकता है, जिससे हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा।
विक्रेताओं ने ज्ञापन में बताया कि पहले ही ई-स्टांपिंग सिस्टम के कारण उनका काम प्रभावित हुआ है और अब यदि बिक्री का कार्य भी निजी हाथों में चला गया तो वे बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था पंजाब स्टांप एक्ट 1934 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है, जिसमें 20 हजार रुपये तक के स्टांप केवल लाइसेंसधारी विक्रेताओं द्वारा बेचे जाने का प्रावधान है। वर्तमान में लोग स्वयं या ऑनलाइन सेंटर के माध्यम से स्टांप निकाल रहे हैं।
एसोसिएशन ने सरकार से स्टांप विक्रय सीमा को कलेक्टर रेट में वृद्धि के अनुरूप बढ़ाने और ई-स्टांपिंग नियमों में संशोधन की भी मांग की। सतीश चुग, संजीव कुमार सहित अन्य विक्रेताओं ने मुख्यमंत्री से रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रतिनिधिमंडल को उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। इस मौके पर मंजीत सिंह, हरपाल सिंह, पुष्पेंद्र, राकेश, सतीश चुग, संजीव कुमार सहित कई स्टांप विक्रेता मौजूद रहे।