संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गधौली कलां गांव में लोगों ने गांव के मोड़ पर लगे नाके को लेकर ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा यहां से नाका हटाने की मांग करते हुए रोष प्रकट किया। गांव के परमैल सिंह, राजू, बंटी, मेहर चंद, बाबू, नेसी, प्रेम, मेहरचंद, कुलदीप कुमार ने सरपंच पर टोल कर्मचारियों के साथ मिलकर गांव के मोड़ पर नाका लगाकर पैसे ऐंठने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का आरोप है यह कार्य कई दिनों से चल रहा है।
गांव के प्रेम ने बताया कि सरपंच ने टोल वालों के साथ मिलकर नाके को लगाया है, जो कि गलत है नाके पर दस आदमी बैठते हैं जोकि पैसे का लेनदेन भी कर रहें हैं। गांव में दिनरात वाहनों का आवागमन हो रहा है जिसकी वजह से बच्चे भी सड़क पर भी आ जाते हैं। इससे हादसे होने का भी डर बना रहता है
गांव के मेहर चंद ने बताया कि नाके से कोई भी एतराज नहीं है लेकिन गांव में भी विकास होना चाहिए, जिस तरह से गांव से वाहन गुजर रहे हैं पंचायत को चाहिए कि गांव में स्पीड ब्रेकर आदि होने चाहिए जिसकी वजह से तेज रफ्तार आने वाले वाहनों को रूक कर चलना पड़े।
गांव के कुलदीप कुमार ने बताया के यह नाका अवैध तरीके से लगाया गया है और गांव में दो नाके लगाए गए हैं जिसमें दो लोग गांव के व अन्य लोग टोल के हैं। नाके को लगे हुए एक साल चार माह हो गए हैं। पंचायत के पास गांव के विकास के लिए तो पैसे नहीं फिर नाके पर लगे कर्मियों को सैलरी कहां से दी जा रही है।
गांव के निखिल ने बताया कि गांव में रिश्तेदारों को भी नाके से बैरंग लौटा दिया जाता है और रिश्तेदार फोन कर जानकारी देते हैं और खुद ही नाके पर आकर बताना पड़ता है कि हमारे रिश्तेदार हैं।
नाके पर लगे गांव के महिंद्र ने बताया कि सरपंच के माध्यम से उन्हें सैलरी दी जा रही है, और नाके को भारी वाहनों की रोकथाम के लिए लगाया गया है क्योंकि गांव के आगे पुलिया कमजोर है जिसकी वजह से हादसा हो सकता है। नाके पर लगे महिंद्र ने गांव के सरपंच का फोन नंबर तक नहीं है अगर कोई बहस आदि हो जाए तो कैसे मामले को सुलझाया जाएगा।
टोल इंचार्ज संदेश प्रताप सिंह ने बताया कि आरोप बेबुनियाद हैं। गधौला कलां में लगे नाके का टोल से कोई भी लेनदेन नहीं है, ग्रामीणों द्वारा लगाए आरोप कि टोल कर्मचारी नाके पर बैठते हैं, ऐसा भी नहीं है। सरपंच ने अपने आधार पर नाके को लगाया है और पंचायत ही अपने स्तर पर नाके पर लगे कर्मचारियों को भुगतान कर रही है।
ग्रामीणों की सहमति से लगाया नाका : सरपंच
गांव के सरपंच दिलबाग सिंह ने कहा कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वह पूरी तरह से गलत हैं। ग्रामीणों की सहमति से ही नाका लगाया गया है, क्योंकि गांव में स्कूल और कॉलेज होने की वजह से और गांव में गलियां तंग होने की वजह से भारी वाहनों के लिए लगाया गया था लेकिन कुछ शरारती लोगों की वजह से विरोध हो रहा है। गांव से आगे भी पुलिया तंग और क्षतिग्रस्त हालत में है जिसकी वजह से कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की संभावना बनी रहती है। गांव में नाका डीएपी रह चुके प्रमोद की सहायता से लगाया गया था ताकि भारी वाहनों पर अंकुश लगाया जा सके। पहले भी गांव में ओवरलोड वाहनों की वजह से बिजली के पोल टूट चुके हैं।