संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ईएसआई अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ के तीन माह की छुट्टी पर जाने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पहुंचने वाले मरीजों को अब उपचार के लिए सरकारी या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। डॉक्टर की अनुपलब्धता का असर अस्पताल की ओपीडी पर पड़ रहा है, जिससे श्रमिक वर्ग को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ईएसआई अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 300 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या नेत्र रोगियों की होती है। इन दिनों गर्मी के मौसम में आंखों में एलर्जी, जलन, खुजली और संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में नेत्र रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक मरीज पहुंचते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक के तीन माह के अवकाश पर जाने से मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल पहुंचे रमेश ने बताया कि उन्हें आंखों की जांच और उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। निजी अस्पतालों में इलाज कराने पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जबकि ईएसआई के तहत इलाज उनकी सुविधा का हिस्सा है।
ईएसआई योजना के तहत विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी अपने वेतन से अंशदान जमा करते हैं, ताकि उन्हें और उनके परिवार को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
ईएसआई अस्पताल पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। यहां मेडिकल ऑफिसर के स्वीकृत 26 पदों में से 20 पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके अलावा अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट का पद भी खाली है। यमुनानगर में प्लाईवुड, मेटल और अन्य बड़े उद्योगों में हजारों श्रमिक कार्यरत हैं, जिनकी चिकित्सा व्यवस्था का प्रमुख केंद्र ईएसआई अस्पताल है।
अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ तीन महीने की छुट्टी पर गए हैं। इससे अब नेत्र रोगियों की ओपीडी नहीं हो रही है। -डॉ. सुमन चौहान, एमएस, ईएसआई अस्पताल यमुनानगर।