संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में अवैध खनन को लेकर नया खुलासा हुआ है। अवैध खनन करने वाले वाट्सअप ग्रुप से अफसरों की रेकी कर रहे हैं। पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की एक-एक पल की जानकारी दी जाती है। ओके रिपोर्ट होने पर ही खनन के वाहन आगे बढ़ते हैं। सोशल मीडिया पर एक ग्रुप की वीडियो वायरल होने के बाद खलबली मची है। खनन विभाग के अफसरों ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
यमुनानगर जिले में अवैध माइनिंग और ओवरलोड वाहनों को लेकर नया मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है। जिसमें एक वाट्सअप ग्रुप में हुई चैट है। यमुनानगर के अलग-अलग क्षेत्र के अलावा आसपास के जिलों को लेकर भी कमेंट किए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि यह ग्रुप अवैध खनन करने वालों ने बनाया है।
इसके माध्यम से अवैध खनन के वाहन को पास कराने के लिए पुलिस व प्रशासनिक अफसरों पर नजर रखी जाती है। जब सरकारी अधिकारी माइनिंग जोन में एंट्री करता है तो चौक चौराहे पर खड़े ग्रुप के सदस्य लोकेशन बताते हैं। जिससे अवैध खनन वाले भी सतर्क हो जाते हैं। वाहनों को निकालने के लिए भी ग्रुप का प्रयोग किया जाता है। जहां जहां से खनन का वाहन गुजरता है वहां-वहां से से ओके रिपोर्ट मिलने पर ही वाहन चालक आगे बढ़ता है।
2020 में भी सामने आया था इस तरह का मामला
एंटी करप्शन सोसाइटी के प्रदेशाध्यक्ष और अधिवक्ता वरयाम सिंह ने कहा कि रेकी ग्रुप के जरिए बड़े-बड़े गैर कानूनी काम इन ग्रुपों के जरिये हो रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकारी तक इन ग्रुपों के बारे में जानते हैं। लेकिन, इन ग्रुपों पर कंट्रोल नहीं लगा है। वरयाम सिंह ने कहा कि हमने साल 2020 में इन ग्रुपों के खिलाफ एक मामला दर्ज कराया था। जिसके बाद इसके लिए एक एसआईटी बनी थी लेकिन वो सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई।
अवैध माइनिंग हो रही है जिसको लेकर विभाग पूरी तरह से सख्त है। फिलहाल हमारा फोकस यमुनानगर के उत्तर क्षेत्र की ओर है। प्राइवेट वाहनों के जरिए रिकी ग्रुप चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करेंगे। - चंद्र भूषण तिवारी, खनन विभाग अधिकारी