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जब अधिकारी ही नहीं, कैसे हो सैंपलिंग

Tue, 18 Oct 2016 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
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 फेस्टीवल सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और मिलावटखोरों पर लगाम लगाने की सुध स्वास्थ्य विभाग को नहीं है। यही वजह है कि अब तक विभाग ने सैपलिंग तो दूर उसके लिए रणनीति तक तैयार नहीं की है। नवरात्र और दशहरा मनाया जा चुका है। करवा चौथ और दीवाली पर्व आने वाले हैं। यदि अब भी सैंपलिंग लिए गए, तो उनकी रिपोर्ट आने में दिवाली ही भैया दूज तक निकली चुकी होगी और सारी मिठाइयां भी बिक चुकी होंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि सैंपलिंग की रिपोर्ट आने में ही 15 दिन लग जाते हैं।
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यमुनानगर जिले की सीमाएं तीन प्रदेशों से सटी हैं। ऐसे में यहां मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचे जाने की आशंका बहुत अधिक रहती है। त्योहार नजदीक होने पर मिलावट का धंधा चरम पर होता है। दो साल पहले स्वास्थ्य विभाग ने यूपी से आने वाली बस से बड़ी मात्रा में खोआ पकड़ा था। इसे बोरियों में भरकर सप्लाई किया जा रहा था। बीते साल ही विभाग ने सॉस की फैक्टरी पकड़ी थी। उसमें कद्दू से सॉस बनाया जा रहा था।
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्टेशन करता है सैंपलिंग  
मिलावटी खाद्य पदार्थों पर अंकुश लगाने के लिए एक अप्रैल 2012 को स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विंग बनाई गई थी। इसे ही खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग करने की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन, विभाग के पास न तो स्टाफ है और न ही पर्याप्त साधन। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन का विंग जगाधरी सिविल अस्पताल परिसर स्थित बिल्डिंग में स्थित है। लेकिन, यहां फूड सुरक्षा अधिकारी ही नहीं है। हिसार जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. प्रेम सिंह के पास यमुनानगर का अतिरिक्त चार्ज है। इसी तरह कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर ही है। विभाग के पास इसके अलावा अन्य स्टाफ नहीं है। जब भी विभाग को सैंपलिंग करनी होती है तो सीएमओ कार्यालय से गाड़ी और स्टाफ मंगाया जाता है। सेपलिंग की रिपोर्ट भी स्वास्थ्य विभाग के एक या दो कर्मचारी ही चंडीगढ़ स्थित लैब में देकर आते हैं।
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विंग बना, लेकिन पॉवर सीएमओ के पास
लोगों को शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए फूड एंड ड्रग एडमिनिस्टेशन की विंग तो बना दी गईं, लेकिन इसके मुखिया के हाथ बांध दिए गए। विंग के मुखिया यानी खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पास सैंपलिंग की पॉवर तक नहीं है। विंग में डेजिगनेटेड ऑफिसर का पद है, लेकिन इस पर तैनाती नहीं हैं। सीएमओ के पास ही डेजिगनेटेड ऑफिसर का जिम्मा है। कहीं भी सैंपलिंग से पहले सीएमओ से ही विंग को अनुमति लेनी पड़ती है।
स्टोर की जा रही मिठाइयां
दिवाली पर मिठाइयों की डिमांड बढ़ जाती है। ऐसे में दुकानदार पहले ही मिठाइयां स्टोर कर लेते हैं। ये मिठाइयां ही दिवाली पर बाजार में बेची जाती हैं। मिठाई बनाने वाले इस दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों का भी पालना नहीं करते। नियम के मुताबिक खाद्य पदार्थ बनाने वाले व्यक्ति का मेडिकल होना चाहिए। जहां सामान बनाया जा रहा है, वहां पर साफ सफाई होनी चाहिए।

इस सप्ताह से शुरू होगा अभियान : डॉ. रमेश
कार्यवाहक सीएमओ डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि सैंपलिंग की प्लानिंग कर ली गई है। अभी फेस्टीवल सीजन शुरू हुआ है, इस सप्ताह से बाजार में सैंपल लिए जाएंगे। विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है।
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