संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। दीनबंधु छोटू राम थर्मल पॉवर प्लांट के अंदर 409.242 हेक्टेयर (1011.26 एकड़) भूमि पर 5352.75 करोड़ से लगने वाली नई 800 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट की पांच जुलाई को जनसुनवाई के बाद अब सबकी निगाह ईसी (इनवायरमेंट क्लीयरेंस) पर रहेगी। यह मंजूरी दिल्ली मिनिस्ट्री ऑफ इनवायरमेंट को देनी है। उसके बाद ही नई यूनिट का काम शुरू हो सकेगा।
थर्मल अधिकारियों का दावा है सितंबर माह में कार्य शुरू होने की संभावना है। इसके बाद 48 माह यानी 2028 तक नया प्लांट बनकर तैयार होने के बाद बिजली उत्पादन शुरू हो सकेगा। मौजूदा समय में थर्मल पॉवर प्लांट में 600 मेगावाट की यूनिट स्थापित है, जिससे 12.61 लाख मीट्रिक टन बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं राख को स्टोर करने के लिए लापरा गांव में दो बड़े तालाब बनाए जाने हैं जिनकी कुल क्षमता 43.62 लाख मीट्रिक टन होगी। वर्तमान में 5.91 लाख मीट्रिक टन के तालाब हैं जिनकी क्षमता 25.16 लाख मीट्रिक टन है, जिसे नीलामी के माध्यम से राख विभिन्न कंपनियों को बेची जा रही है।
विदित हो कि 800 मेगावाट की नई यूनिट लगने के बाद यमुनानगर भी हरियाणा का पहला ऐसा जिला बन जाएगा, जहां पर सबसे बड़ी बिजली उत्पादन की इकाई होगी। अभी तक झज्जर में 1320, पानीपत में 710 और हिसार के खेदड़ में 1200 मेगावाट की इकाइयां लगी हुई हैं।
नई यूनिट के लिए 22 क्यूसेक पानी की आवश्यकता
नई 800 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल यूनिट के लिए 22 क्यूसेक पानी की भी आवश्यकता होगी, जबकि मौजूदा समय में दीनबंधु छोटू राम थर्मल पॉवर प्लांट की 600 मेगावाट यूनिट के लिए 19 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। इसके लिए पश्चिमी यमुना नहर से पानी की निकासी सिंचाई विभाग द्वारा की जा रही है।