यमुनानगर। अब स्कूलों में विद्यार्थियों के मार्क्स पर कम पढ़ने की आदत पर जोर दिए जाने को लेकर प्लानिंग बनाई गई है। ऐसे में खामियों को दूर करने के लिए इस दिशा में कार्य भी शुरू हो चुका है। दरअसल, निपुण हरियाणा मिशन के ताजा आंकलन किया है।
इस पर कई सरकारी विद्यालयों में बहुत से बच्चे बुनियादी पढ़ना, लिखना और गिनना जैसे मूलभूत कौशल में कमजोर पाए गए हैं। इसी को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सिर्फ परिणामों का डेटा नहीं, बल्कि हर स्कूल से विस्तृत अधिगम रिपोर्ट यानी तलब की है।
बताया जा रहा है कि इस बार सिर्फ अंक या रैकिंग मुद्दा नहीं हैं। मूल्यांकन में विद्यार्थियों के कमजोर प्रदर्शन की जड़ कम उपस्थिति है। अधिकतर विद्यालयों में कुछ समान चुनौतियां सामने आई हैं, कक्षा चौथी पांचवीं तक बच्चों की नियमित उपस्थिति काफी कम रहती है। इसके साथ ही कुछ स्कूलों में एक शिक्षक द्वारा कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं। बच्चों की शुरुआती स्तर की पढ़ाई पहले दिन से कमजोर है। माता-पिता की पढ़ाई में कम रुचि और घर पर अध्ययन का अभाव है। वहीं, अब मेहनत रिजल्ट में दिखनी चाहिए। मूल्यांकन दिसंबर के तीसरे सप्ताह में होगा। संवाद