संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सरस्वती शुगर मिल ने पर्ची वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है। आगामी पेराई सत्र से किसानों को अब कागज की इंडेंट (पर्ची) नहीं दी जाएगी। मिल प्रशासन ने पारंपरिक व्यवस्था को खत्म कर तकनीक आधारित प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत किसानों के मोबाइल फोन पर एसएमएस से गन्ना आपूर्ति की सूचना भेजी जाएगी।
मिल के नवनियुक्त सीईओ कुलदीप कुमार ने शुक्रवार को पदभार संभालने के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसके सचदेवा के मुख्यालय स्थानांतरण के बाद उन्होंने सीईओ का कार्यभार संभाला है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को पर्ची संभालने और खोने की चिंता नहीं रहेगी।
सीईओ ने बताया कि किसान मोबाइल पर आए संदेश को खुद या किसी अन्य व्यक्ति को भेजकर शुगर मिल में गन्ना पहुंचा सकेंगे। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया जा रहा है। गन्ने की खेती किसानों के लिए लाभकारी फसल है। यह फसल प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने में भी सक्षम है। वर्तमान मौसम और परिस्थितियां गन्ने की बेहतर पैदावार के लिए अनुकूल हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को भुगतान और गन्ना आपूर्ति को लेकर किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले पेराई सत्र में सरस्वती शुगर मिल क्षेत्र में करीब 62 हजार एकड़ में गन्ने की फसल खड़ी थी। मिल प्रशासन का लक्ष्य गन्ने का रकबा बढ़ाना और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
किसानों को गन्ने की नई और उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध करवाने के साथ प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। मजदूरों की कमी को देखते हुए आगामी सीजन में किसानों को गन्ना कटाई के लिए मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस दौरान सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (एडमिन) डीपी सिंह, वाइस प्रेजिडेंट (केन) ललित सैनी और एजीएम अश्वनी कुमार आर्य भी मौजूद रहे। मिल प्रशासन का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था से किसानों को सुविधा मिलेगी और गन्ना आपूर्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।