संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। धान की कटाई के बाद खेतों में फसल अवशेष में आग लगाने वाले किसानों पर इसरो के सेटेलाइट से अब 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। ऐसा इसलिए ताकि प्रदेश के सभी जिलों में फसल अवशेष में आग लगाए जाने के एक-एक मामले को पकड़ा जा सके।
ज्यादा मामले पकड़ में आएंगे तो जुर्माना भी ज्यादा वसूला जा सकेगा, साथ ही थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकेगी। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जुर्माना व एफआईआर के भय से आने वाले दिनों में पराली व फसल अवशेष में आग लगाने के मामलों में कमी आएगी।
खेतों में जलाई जा रही पराली पर पहले भी सेटेलाइट से नजर रखी जा रही थी। सेटेलाइट से काम हरसेक (हरियाणा स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर) द्वारा कुछ घंटों के हिसाब से लिया जा रहा था। इसके बदले में हरसेक इसरो को घंटे के हिसाब से भुगतान करता था। पराली जलाने के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए मॉनिटरिंग का काम इसरो को सौंप दिया गया है।
इसरो के अपने सेटेलाइट हैं जिनसे किसी भी वक्त पराली में आग लगाने जैसे घटनाओं को पकड़ा जा सकता है। हरसेक हरियाणा सरकार का एक नोडल एजेंसी है जो रिमोट सेंसिंग और जीआईएस एप्लीकेशन से जुड़े काम करती है। हरसेक केंद्र चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी हिसार परिसर में स्थित है।
यमुनानगर में अभी तक खेतों में फसल अवशेष जलाने के 14 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से नौ मामले ही ट्रेस हो पाए हैं, जिनमें किसानों पर 22500 रुपये जुर्माना करके वसूली की गई है। साथ ही एक दिन पहले थाना रादौर में घिलौर गांव के एक किसान के खिलाफ पराली जलाने के आरोप में केस भी दर्ज कराया गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एपीपीओ डाॅ. सतीश अरोड़ा का कहना है कि जिले में पराली जलाने के अभी तक 14 मामले सामने आ चुके हैं। अब हरसेक के बजाय इसरो की ओर से अपने सेटेलाइट से 24 घंटे पराली जलाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है। इससे ज्यादा से ज्यादा मामले ट्रेस हो सकेंगे। साथ ही तुरंत कार्रवाई भी की जा सकेगी।