संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सरकार ने वन विभाग से सेंचुरी सहित कलेसर नेशनल पार्क की जिम्मेदारी तो पहले ही वापस ले ली है। वहीं अब आठ कर्मचारियों का स्टाफ भी वन्य प्राणी विभाग को शुक्रवार को ट्रांसफर कर दिया गया है। इसमें पांच गार्ड, दो दरोगा और एक उप वन राजिक अधिकारी शामिल है। ऐसे में वन्य प्राणी विभाग के पास 13 कर्मचारी हो गए और सुरक्षा करेंगे।
वन विभाग के पास 50 से अधिक कर्मचारी थे। मिले कर्मचारियों से जंगल की गश्त आसान नहीं होगी। इसके लिए कर्मचारियों को काफी मेहनत करनी पड़ेगी। दरसअल, वर्तमान में वन्य प्राणी विभाग के पास वन्य जीवों की सुरक्षा का भार है, वहीं अब नेशनल पार्क की भी जिम्मेदारी बढ़ गई। कलेसर नेशनल पार्क हरियाणा का सबसे बड़ा जंगल है। इसमें कलेसर जंगल 11,570 एकड़, वन्य प्राणी विहार 13,209 एकड़ और नगली वन प्राणी क्षेत्र 222.65 एकड़ में फैला हुआ है। इन्हीं को सरकार ने शनिवार को वन विभाग से वापस लेकर वन्य प्राणी विभाग को सौंप दिया है। बता दें 1994 में अंबाला से अलग होकर यमुनानगर वन विभाग अलग डिवीजन बना।
इन 31 सालों में ऐसा पहली बार हुआ जब कलेसर नेशनल पार्क को वन्य प्राणी विभाग को सौंप दिया गया। वहीं, अब इसकी सुरक्षा को लेकर प्रश्न चिन्ह भी लग गया है। चूंकि, वन्य प्राणी विभाग के पास स्टाफ नहीं। मात्र इंस्पेक्टर सहित चार गार्ड यहां कार्य कर रहे। वर्तमान में इनके ऊपर जंगल में विचरण करने वाले वन्य प्राणियों की सुरक्षा का भी जिम्मा है।
सरकार के आदेशों के अनुसार जंगल एरिया तो पहले वन्य प्राणी विभाग को सौंप दिया गया है। यहां से आठ कर्मचारी भी उन्हें ट्रांसफर कर दिए गए हैं।
- संदीप सिंह सैनी, डीएफओ, वन विभाग यमुनानगर।
हमें आठ कर्मचारी मिल चुके हैं, इस तरह कुल 13 कर्मचारियों की संख्या हो गई है। लेकिन, एरिया के हिसाब से कर्मचारियों की संख्या बहुत कम है। इनसब के बाद भी हम पूरी सतर्कता के साथ कलेसर नेशनल पार्क की रखवाली करेंगे।
- लीलू राम, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग यमुनानगर।