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Yamuna Nagar News: गर्भवतियों का पंजीकरण नहीं कराने पर 10 को दिया नोटिस

Tue, 16 Jun 2026 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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जिला नागरिक अस्पताल। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले में गिरते लिंगानुपात और गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण नहीं कराने पर स्वास्थ्य विभाग ने जिला आशा कोऑर्डिनेटर, छह ब्लॉक आशा कोऑर्डिनेटर, एक आशा वर्कर और एक एएनएम सहित कुल 10 स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसके अलावा एमटीपी किट का प्रयोग करने वाली एक गर्भवती को भी नोटिस दिया गया है।
पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. विपिन गोंदवाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया है। विभाग की ओर से प्रत्येक गर्भवती महिला का रिकॉर्ड तैयार करने और उसे ट्रैक करने की व्यवस्था लागू की गई है।
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इसके तहत आशा वर्करों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे 12 सप्ताह के भीतर प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीकरण सुनिश्चित करें।
गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड जांच के समय अपना पूरा पता दर्ज कराना अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था सरकारी और निजी दोनों स्वास्थ्य केंद्रों पर लागू है, ताकि गर्भावस्था से संबंधित गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध प्रथाओं को रोका जा सके। विशेष रूप से उन गर्भवतियों की निगरानी की जा रही है जिनके परिवार में पहले से एक या दो बेटियां हैं। भ्रूण लिंग जांच संबंधीगतिविधि की सूचना देने के लिए 7015995370 नंबर जारी किया गया है।
उधर, स्वास्थ्य विभाग की पीएनडीटी टीम की जांच में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से भ्रूण लिंग जांच किए जाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
गत वर्षों में की गई अधिकांश कार्रवाई का संबंध उत्तर प्रदेश से जुड़ा मिला था। इस वर्ष भी टीम ने कई बार जाल बिछाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। हाल ही में पीएनडीटी टीम ने सहारनपुर जिले के अंबेहटा चांद और देवबंद क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक महिला और एक युवक को भ्रूण लिंग जांच करते हुए पकड़ा। दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जिले में एक हजार लड़कों पर 928 लड़कियां
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले का वर्तमान लिंगानुपात 928 है। एक हजार लड़कों पर 928 लड़कियां हैं। रादौर और छछरौली ब्लॉक में स्थिति अपेक्षाकृत अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। विभाग ने ऐसे लगभग 80 गांवों की पहचान की है जहां प्रति एक हजार लड़कों पर 800 या उससे भी कम लड़कियां हैं। इन गांवों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
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पीएनडीटी एक्ट में कैद और आर्थिक दंड का प्रावधान
भारत में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और घटते लिंगानुपात को सुधारने के लिए बनाया गया एक सख्त कानून है। इसके तहत जन्म से पहले बच्चे के लिंग की जांच करना या बताना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। लिंग जांच करने या करवाने वाले डॉक्टर, लैब कर्मी या रिश्तेदार को 3 से 5 साल तक की जेल और दस हजार रुपये से लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दोषी पाए जाने वाले चिकित्सक का मेडिकल रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है। सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर गर्भवती महिला का 'फॉम एफ भरना अनिवार्य है,जिसमें जांच का कारण बताना होता । लिंग परीक्षण से जुड़े किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है।
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