मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की घोषणाओं के बावजूद महीनों बाद भी आज
तक सब तहसील रादौर को तहसील का दर्जा नहीं मिल पाया है। मुख्यमंत्री ने
रादौर रैली में की गई घोषणाएं एक जनवरी से लागू किए जाने का जनता से वादा
किया था।
रादौर निवासी नीतिश जोगी, सुनील फतेहगढ़, धीरपाल सैनी,
धर्मेंद्र चौहान, दिनेशमान आर्य और संदीप सैनी ने कहा कि15 सितंबर को रादौर
में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की रैली आयोजित की गई थी।
रैली
में मुख्यमंत्री ने जनता को लुभाने के लिये करोड़ों रुपये की ग्रांट राशि
विकास कार्यों के लिये घोषित की थी। इसके अलावा सांसद नवीन जिंदल ने रैली
में मुख्यमंत्री से रादौर को उपमंडल का दर्जा दिये जाने की मांग की थी।
लेकिन मुख्यमंत्री ने सांसद की मांग को नजरअंदाज करते हुए रादौर को सब
तहसील से तहसील का दर्जा दिये जाने की रैली में घोषणा की थी।
सीएम
ने रैली में घोषणा की थी कि सभी मांगे एक जनवरी तक पूरी कर दी जाएगी। एक
जनवरी बीत जाने के बावजूद आज तक रादौर को तहसील का दर्जा नहीं मिल पाया है।
इससे जनता में रोष बढ़ता जा रहा है। आज भी सब तहसील रादौर में नायब
तहसीलदार कार्यरत हैं, जबकि घोषणा के अनुसार एक जनवरी से रादौर सब तहसील
में तहसीलदार की नियुक्ति हो जानी चाहिये थी।
इस बारे भारतीय किसान
यूनियन प्रदेश सचिव विजय मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी घोषणा के
अनुसार रादौर को अब तक तहसील का दर्जा दिलवा देना चाहिए था। उन्होंने रोष
जताते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री ने यह घोषणा रोहतक में की होती तो अब तक
यह घोषणा पूरी हो जाती।