सीआरपीएफ में हवलदार रहे हरियाणा के यमुनानगर जिले के गांव कल्याणपुर के नूर हुसैन (42) बीते रोज छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के हमले में गोली लगने से शहीद हो गए। रविवार देर शाम नूर हुसैन के शहीद होने की सूचना मिलते ही उनके घर पर मातम पसर गया।
शहीद के 17 वर्षीय बेटे मोइन ने बताया कि सीआरपीएफ के अधिकारी ने उन्हें मोबाइल पर पिता नूर हुसैन के नक्सली हमले में गोली लगने से घायल होने की सूचना दी थी। दो घंटे बाद पता चला कि पिता नूर हुसैन शहीद हो गए हैं। बताया गया कि नूर हुसैन के नेतृत्व में सीआरपीएफ की एक टुकड़ी नक्सल प्रभावित बीजापुर में गश्त कर रही थी। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे नक्सलियों ने इस टुकड़ी पर गोलीबारी कर दी।
इसमें नूर हुसैन के अलावा उनके दो-तीन साथी भी घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल नूर हुसैन की उपचार के दौरान मौत हो गई। नूर हुसैन का शव सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद जगदलपुर व रायपुर होते हुए दिल्ली पहुंचाया जाएगा। वहां से सड़क मार्ग से शहीद के पार्थिव शरीर को गांव कल्याणपुर लाया जाएगा, जहां मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्दे खाक करने की रस्म अदा की जाएगी।
जीजा ने दी रिटायरमेंट की सलाह तो कर दिया इंकार
वर्ष 1998 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए नूर हुसैन ने फरवरी में बेटी की शादी की थी। उनका अगस्त में श्रीनगर से तबादला बीजापुर हुआ था। बीजापुर जाने से पहले एक माह के अवकाश पर घर आए नूर हुसैन ने इस दौरान मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। अवकाश के बाद चार सितंबर को नूर हुसैन ने बीजापुर में ड्यूटी संभाली। नूर हुसैन के जीजा नाथू ने बताया कि इस बार अवकाश पर घर आए नूर हुसैन को उन्होंने रिटायरमेंट लेने की सलाह दी थी पर ड्यूटी के प्रति सदैव कर्तव्यनिष्ठ रहे नूर हुसैन ने सादगी से उनकी बात मानने से इंकार कर दिया था। भतीजों गफ्फूर व इरफान ने बताया कि अल्प भाषी नूर हुसैन अत्यंत मिलनसार व खुश मिजाज थे।
नूर हुसैन कल्याणपुर गांव का तीसरा शहीद
लगभग 1400 की आबादी की कल्याणपुर पंचायत के लोगों में देशभक्ति का ऐसा जज्बा है कि हर घर का एक या एक से अधिक सदस्य सुरक्षा बलों में तैनात है या सेवानिवृत्त हो चुका है। नूर हुसैन से पहले इस मुस्लिम बहुल गांव के दो वीर देश की रक्षा करते हुए शहीद हो चुके हैं। भारतीय सेना में कार्यरत दीन मोहम्मद वर्ष 1987 में श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों से हुए मुकाबले में शहीद हो गए थे। वहीं सीआरपीएफ का जवान जैमल खान 31 मार्च 2021 को नक्सल प्रभावित असम में हुई गोलीबारी में शहीद हो गए थे। अब सीआरपीएफ में तैनात नूर हुसैन ने वीरगति पाई है।