संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यमुनानगर जोन की सर्वे रिपोर्ट की तरह ही जगाधरी जोन की रिपोर्ट भी चौंकाने वाली आई। सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक जगाधरी में भी 23 कबाड़ की दुकानों पर सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। यह दुकानें भी मौत के मुहाने पर हैं। यहां भी सिटी सेंटर रोड पर कबाड़ गोदाम जैसा बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है।
यमुनानगर जोन में 78 कबाड़ की दुकानें सर्वे के दौरान सामने आई हैं। दोनों जोन को मिलाकर ट्विन सिटी में 101 कबाड़ की दुकानों में किसी प्रकार का कोई अग्नि शमन यंत्र नहीं लगा हुआ है जो कि खतरे से खाली नहीं है।
अग्निकांड के बाद कबाड़ की दुकानों का सर्वे करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। कमेटी जहां-जहां गई वहां खुली पड़ी कबाड़ की दुकानों के हाल देखकर दंग रह गए। दुकानों में ठूंस-ठूंस कर माल को भरा हुआ था। इन कबाड़ी की दुकानों के पास से बिजली की तारें भी गुजरती दिखाई दी। इतना ही नहीं जहां-जहां सर्वे हुआ सभी दुकानेें रिहायशी एरिया में ही खुली मिली।
सुरक्षा की लिहाज से दुकान के अंदर अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए। मगर सर्वे के दौरान कबाड़ी की दुकानों में एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं मिला। ऐसे में अब प्रशासन के आदेश के बाद इन कबाड़ी की दुकानों को अग्निशमन यंत्र लगवाने के लिए नोटिस दिए जाएंगे।
कबाड़ के गोदाम में इस तरह से लगी थी आग
पिछले बुधवार रात डेढ़ बजे सिटी सेंटर के सामने विश्वकर्मा मोहल्ले में बने कबाड़ के गोदाम में अचानक आग लग गई थी। किसी तरह से 18 लोग को बच निकले थे किंतु नियामुद्दीन उर्फ राजू अपनी पत्नी नसीमा, बेटी फिजा, बेटा चांद और रिहान उर्फ छोटू नहीं निकल पा रहे थे। हालांकि नसीमा ने बाहर निकलने के लिए एक बच्चे को गोद में उठाया हुआ था, किंतु अफरा-तफरी के बीच वहीं छूट गया। इसके बाद आग तपिश और धुएं से थम घुटने से उसके पति नियामुद्दीन, बेटी फिजा, बेटा चांद और बेटे रिहान उर्फ छोटू की मौत हो गई। दमकल विभाग और पुलिस कर्मियों ने क्वार्टर की दीवार में छेद कर मृतकों के शवों को बाहर निकाला था।
यमुनानगर जोन के बाद जगाधरी जोन की भी रिपोर्ट आ चुकी है। जगाधरी में 23 कबाड़ी की दुकानें मिली किसी में भी अग्निशमन यंत्र नहीं मिला। यमुनानगर और जगाधरी दोनों जोन की 101 दुकानों हो गई जिनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। दोनों जोन की रिपोर्ट डीसी साहब को सौंपी जाएगी उसके बाद ही अगली कार्रवाई होगी। - अशोक कुमार, उप निगम आयुक्त, नगर निगम।