संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एक दिन पहले प्रतापनगर बस स्टैंड में बस की चपेट में आने से एक छात्रा की मौत और पांच घायल हो गई थी। बस स्टैंड यमुनानगर व जगाधरी पर शुक्रवार को वही हालात मिले जो प्रतापनगर में थे। बस स्टैंड यमुनानगर पर विद्यार्थियों को बसों में लटक कर सफर करते हुए देखा गया।
स्कूल की पढ़ाई पूरी कराने के बाद माता-पिता बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए शहर के कॉलेजों में भेज रहे हैं। माता-पिता का सपना पूरा करने के लिए विद्यार्थियों को जान को जोखिम में डालकर रोडवेज व प्राइवेट बसों सफर करना पड़ रहा है। सुबह घर से समय पर कॉलेज पहुंचने की आपाधापी तो शाम को बस स्टैंड से घर वापस लौटने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।दोपहर बाद बसों में इतनी भीड़ थी कि कॉलेजों व आईटीआई से घर लौट रहे विद्यार्थी बसों में टस से मस नहीं हो पा रहे थे। जैसे ही कोई बस अड्डे के गेट से अंदर प्रवेश करती तो छात्र-छात्राएं चढ़ने के लिए उसकी तरफ लपक पड़ते हैं।
काउंटर पर लगते ही बसों में चढ़ने की होड़ मची रहती है। प्राइवेट बसें काउंटर पर नहीं लगती। वह सीधे से बाहर से आकर बस स्टैंड के बीच में खड़ी हो जाती हैं। नियमानुसार बस को काउंटर पर लगना जरूरी है।यमुनानगर बस स्टैंड पर आईटीआई छात्र भूड़कलां निवासी शिवम, उगाला की खुशी व ईशिका, सारन की सलोनी, सारन की पारूल, मिल्क गांव की सलोनी ने बताया कि वह शहर के कॉलेजों में पढ़ाई के लिए आते हैं। बसों की कमी की वजह से कॉलेज और घर समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। दोपहर दो बजे के बाद शाम को चार बजकर 40 मिनट तक बस ही नहीं मिलती। छुट्टी दोपहर को दो बजे हो जाती है। शाम को घर पहुंचने में अंधेरा हो जाता है।
बस में नहीं मिलती है सीट
प्रतापनगर के हिमांशु ने बताया कि वह जगाधरी के मैनेजमेंट कॉलेज से पढ़ाई कर रहा है। बसों की कमी तो है ही, साथ में रोडवेज बसों में परिचालक अभद्र व्यवहार भी करते हैं। यमुनानगर बस स्टैंड से चढ़कर 20-30 किलोमीटर से पहले बस में सीट नहीं मिलती। भीड़ की वजह से सफर करना मुश्किल हो जाता है।
घंटों करना पड़ता है बस का इंतजार
प्रतापनगर के सूर्य वालिया ने बताया कि वह दामला स्थित कॉलेज से पाॅलिटेक्निक कर रहा है। दोपहर में प्रतापनगर रूट पर बस नहीं है। छुट्टी के बाद वह घंटों यमुनानगर बस स्टैंड पर खड़े रहते हैं, लेकिन बस नहीं आती। इतना समय तो उनका कॉलेज में नहीं लगता जितना बसों की कमी की वजह से घर से आने जाने में लग जाता है।
एक पांव पर खड़े होकर करते हैं सफर
छात्र रिदम ने बताया कि वह पढ़ाई के लिए प्रतापनगर से यमुनानगर आते हैं। दोपहर को जब घर जाते हैं तो बस मिलती नहीं या फिर उनमें भीड़ बहुत ज्यादा होती है। बसों में भीड़ इतनी होती है कि उनमें एक ही पांव पर खड़े होकर सफर करना पड़ता है। जितनी सवारी दो बसों में होनी चाहिए वह ठूस-ठूस कर एक ही बस में भर दी जाती है।
चलती बस में धूम्रपान करते हैं चालक
छात्र टोनी ने बताया कि रोडवेज बस के चालक सफर के दौरान धूम्रपान करते हैं। वह बीड़ी, सिगरेट पीते हैं। जिसका सारा धुआं बस के अंदर ही आता है, इससे यात्रियों को परेशानी होती है। वह बीड़ी, सिगरेट पीने से मना करते हैं तो ड्राइवर धमकाते हैं। उनका तो सारा दिन बसों में ही बीत जाता है। इससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।
यमुनानगर बस स्टैंड से बस की खिड़की में लटक कर जाते विद्यार्थी। संवाद
यमुनानगर बस स्टैंड से बस की खिड़की में लटक कर जाते विद्यार्थी। संवाद
यमुनानगर बस स्टैंड से बस की खिड़की में लटक कर जाते विद्यार्थी। संवाद