संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। सरकारी स्तर पर जिले में केवल ही खेल नर्सरी है। इस नर्सरी में कुल 25 खिलाड़ी हैं पर खेल विभाग के पास नर्सरी के लिए क्रिकेट कोच नहीं है। इसलिए जिले के खिलाड़ियों को निजी स्तर पर प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। इसका असर आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। क्रिकेट की कोचिंग के साथ इसकी सामग्री भी काफी महंगी होती है। ऐसे में आर्थिक कमजोर खिलाड़ी सही तरीके से अभ्यास नहीं पर पा रहे हैं।
वहीं निजी स्कूल क्रिकेट सिखाने की एवज में खिलाड़ियों से हर माह 2,000 से 3,000 रुपये ले रहे हैं, इससे खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों को अपनी जेब से अधिक फीस का भुगतान करना पड़ रहा है। शहर में 15 से अधिक ऐसे निजी स्कूल हैं, जिन्होंने क्रिकेट एकेडमी चला रखी हैं। इन अकादमियों में खिलाड़ियों को खेल की नई तकनीक से अवगत करवाने का दावा किया जाता है। वहीं जिला खेल विभाग के पास क्रिकेट कोच नहीं होने से ही सरकारी नर्सरी के खिलाड़ी प्राइवेट स्कूलों की एकेडमी में जाने को मजबूर हैं। हर दिन दोपहर बाद तेजली खेल परिसर में दर्जनों खिलाड़ी क्रिकेट मैच खेलने के लिए आते हैं, पर कोच न होने के कारण उन्हें खेल को बेहतर बनाने के गुर नहीं मिल पाते। क्रिकेट खिलाड़ी शुभम, आर्यन, जश्न, अविक्षत, प्रद्युमन, सार्थक ने बताया कि सरकारी नर्सरी में कोच न होने के कारण काफी परेशानी हो रही है। क्रिकेट किट का सामान काफी महंगा होता है। हर एक खिलाड़ी यह अकेले नहीं खरीद सकता है। इससे आर्थिक कमजोर खिलाड़ी बीच में ही खेलना छोड़ देते हैं।
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जिले में काफी समय से क्रिकेट का कोच नहीं है। इसके लिए निदेशालय से डिमांड की गई है। अभी तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है। वहीं, सरकारी स्तर पर जिले में एक क्रिकेट एकेडमी संचालित है। इसमें कुल 25 खिलाड़ी अभ्यास करते हैं।
शिल्पा गुप्ता, जिला खेल अधिकारी।