यमुनानगर। खेल प्रतिभाओं के लिए पहचाने जाने वाले यमुनानगर जिले में प्रशिक्षकों की भारी कमी खिलाड़ियों की राह में बड़ी बाधा बन गई है। जिले में कुल 32 खेलों में से 22 खेल ऐसे हैं जिनके लिए कोई कोच उपलब्ध नहीं है। खेल विभाग में कोच के 44 स्वीकृत पदों में से 34 पद खाली पड़े हैं।
हॉकी, फुटबॉल, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, टेनिस, बास्केटबॉल, एथलेटिक्स, जिम्नास्टिक, हैंडबॉल, जूडो, रोइंग, ताइक्वांडो और वॉलीबॉल जैसे कई प्रमुख खेलों के खिलाड़ी बिना प्रशिक्षक के अभ्यास करने को मजबूर हैं। कोच नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। कई प्रतिभाएं मैदान तक ही सीमित रह जाती हैं। उन्हें निखारने वाला कोई नहीं है। खेल विभाग ने कई बार मुख्यालय को कोचों की नियुक्ति के लिए पत्र भेजे हैं। हालांकि, अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। सेवानिवृत्ति के बाद पद खाली होते गए। नई नियुक्तियां नहीं हुईं, जिससे यह कमी बनी हुई है। खिलाड़ियों और अभिभावकों ने सरकार से जल्द खाली पद भरने की मांग की है।
खिलाड़ियों पर असर और निजी अकादमियों का रुख
बेहतर प्रशिक्षण की तलाश में खिलाड़ी निजी खेल अकादमियों का रुख कर रहे हैं। उन्हें वहां अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। पूर्व जिला खेल अधिकारी परमिंद्र सिंह ने कहा कि कोच ही खिलाड़ी को खेल के दांव-पेच और तकनीक सिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पर्याप्त कोच उपलब्ध हों तो जिले के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पदक जीत सकते हैं।
जिले में खेल से संबंधित सभी जरूरतों के बारे में मुख्यालय को समय-समय पर लिखा जाता है। कोच की कमी के बारे में भी अवगत कराया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही जिले में नए कोच आ जाएंगे।
शिल्पा गुप्ता, जिला खेल अधिकारी यमुनानगर