संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। अगले सप्ताह से चार महीने तक मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। चार महीने के लिए सृष्टि के पालक भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे। उनके निद्रा में चले जाने से विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नवनिर्माण सहित अन्य शुभ व मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस बार देवशयनी एकादशी छह जुलाई को पड़ रही है। इस चार माह की अवधि को चातुर्मास व खरमास भी कहा जाता है।
पंडित रमन वत्स ने बताया कि भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद कार्तिक माह की एकादशी को उठेंगे। शास्त्रों में इसे देवउठनी एकादशी कहा गया है। इस साल देवउठनी एकादशी एक नवंबर को पड़ रही है। यानी छह जुलाई से एक नवंबर तक मांगलिक कार्यों के मंत्र और न ही विवाह की शहनाई सुनाई देगी। भगवान विष्णु के निद्रा में रहने के अवधि तक देवों के देव महादेव सृष्टि का संचालन करेंगे।
उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु सृष्टि के पालक हैं। उनके निद्रा में चले जाने के कारण मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। भगवान विष्णु के निद्रा में होने के कारण मांगलिक कार्यों में देव आशीर्वाद नहीं मिलता है। शास्त्रों व पुराणों के अनुसार जब भी वैदिक, मांगलिक कार्य होते हैं तो वहां पर सृष्टि के पालक का आह्वान किया जाता है। आह्वान पर भगवान विष्णु अलौकिक रूप से वहां उपस्थित भी होकर आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि चातुर्मास या खरमास में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।
ध्यान व पूजन का होता है समय
पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि चातुर्मास में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। यह पूजन और ध्यान साधना के लिए बेहद उत्तम समय होता है।इस चार माह में की पूजा से भक्त को पूरे वर्ष की पूजा का फल मिलता है। वहीं, देवशयनी व देवउठनी एकादशी का व्रत बेहद मंगलकारी होता है। यह दोनों व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं व भक्तों की मनोवांछित फल देते हैं। भगवान विष्णु की पूजा करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा सदा बनी रहती है।