कस्बा रादौर की वाल्मीकि बस्ती में रहने वाले धर्मबीर वाल्मीकि (35) की बुधवार को एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। परिजनों के अनुसार उसे डेंगू था। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है। धर्मबीर कई दिन से बुखार से पीड़ित था। परिजनों ने उसका रादौर में कुछ दिन तक इलाज करवाया।
हालत में कोई सुधार न होने पर परिजन उसे यमुनानगर के एक निजी अस्पताल में ले आए, जहां बुधवार को उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। मृतक धर्मबीर के परिजनों का कहना है कि निजी अस्पताल के डॉक्टर ने धर्मबीर को डेंगू बताया था।
अस्पताल में उसका ब्लड टेस्ट भी करवाया गया था। मृतक धर्मबीर वाल्मीकि रादौर पंचायत में लगभग चार साल से सफाई कर्मचारी के तौर पर कार्यरत था। उसके दो बच्चे हैं।
धर्मबीर का पहले रादौर और फिर यमुनानगर के निजी अस्पताल में इलाज करवाया गया। उसका सरकारी लैब में डेंगू टेस्ट नहीं हुआ है। मृतक की रिपोर्ट मंगवाई गई है। रिपोर्ट देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
डॉ. वीके जैन, जिला मलेरिया अधिकारी
वाल्मीकि बस्ती में फॉगिंग करवाने की मांग
वेलफेयर एसोसिएशन ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से वाल्मीकि बस्ती रादौर व आसपास के क्षेत्र में जल्द से जल्द फॉगिंग करवाने की मांग की है। प्रधान सुशील अग्रवाल ने कहा कि रादौर में मच्छरों की भरमार है लेकिन स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर रहा है।
डेंगू पीड़ितों की संख्या 90 तक पहुंची
जिले में कंफर्म डेंगू पीड़ितों की संख्या 90 तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में डेंगू से किसी की मौत नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग उन्हीं केसों को डेंगू मानता है, जिनका सरकारी लैब में टेस्ट के बाद डेंगू की रिपोर्ट आती है। हालांकि जिले के प्राइवेट अस्पतालों में भी डेंगू का टेस्ट किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी प्राइवेट अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अस्पतालों में आने वाले डेंगू पीड़ितों के बारे में स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें।