फरीदाबाद के गांव सुनपेड़ में हुई घटना के विरोध में रविवार को दलित संगठनों ने शहर में प्रदर्शन किया और लघु सचिवालय के सामने सीएम का पुतला फूंका। इसकी अध्यक्षता ईश्वर गुहणा ने की व संचालन चंद्र मोहन ने किया।
मुख्य वक्ता के रूप में डा. राजेंद्र बड़गुर्जर, डीएएसएफआई के प्रेस प्रवक्ता रोहताश मेहरा, डा. रमेश कुमार, डीएएसएसएफआई के अंबेडकर कॉलेज इकाई के प्रधान बंसी लाल मेहरा ने मुख्य रूप से शिरकत की।
डा. रमेश कुमार ने कहा कि प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं और न ही उन केसों की सही ढंग से जांच की का जा रही है। क्योंकि जांच करने वाले भी सभी ऊंची जाति के लोग हैं और देश का सिस्टम ही ऐसा है कि जब भी आप पुलिस में एफआईआर भी दर्ज करवाने जाते हैं तो सबसे पहले आपकी जाति पूछी जाती है। सदियों से दलितों पर अत्याचार होते आए हैं। लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला।
मिर्चपुर के दलित टैंट में गुजार रहे जीवन
मिर्चपुर कांड के पीड़ित दलित आज अपना जीवन टैंट में गुजार रहे हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई का संकट तो है ही, उससे अधिक रोजगार की भी संकट है। केंद्रीय मंत्री जनरल विके सिंह ने सुनपेड़ कांड पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो इसके केंद्र सरकार का क्या कसूर है।
इससे ही जनरल वीके की मानसिकता का पता चलता है। यदि देश में कुछ भी गलत होता है तो वो सरकार से ही शिकायत करेंगे या कहीं ओर बाहर जाकर करेंगे। यदि वह शासन करने लायक नहीं तो छोड़ दे शासन। दो बच्चों को आग में जिंदा जला दिया गया। इस घटना से लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। दोषी पुलिस कर्मियों को बचाने के लिए मामले को कुछ और ही रंग दिया जा रहा है।
यहां तक सरकार के द्वारा इसे रंजिश का मामला बताया जा रहा है। गोहाना कांड और हिसार का बठला कांड इसी प्रकार के कुछ उदाहरण है कि आज दलितों के साथ भेदभाव किया जाता है और आज उन पर अत्याचार किया जा रहा है।