संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 46वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि जैन धर्म के विशिष्ट महापर्व चल रहे है। पर्यूषण पर्व का तीसरा दिन है। पर्व का मतलब होता है, परम पवित्र दिवस। इन परम पवित्र दिनों में अंतगढ़ सूत्र की वाचना चल रही है। आज की वाचना में साध्वी ने गज सुकुमाल मुनि का जीवन चरित्र सुनाया। बताया कि गज सुकुमाल का जन्म द्वारिका नगरी में हुआ था।
उनके पिता वासुदेव व माता देवकी थी। वासुदेव श्रीकृष्ण महाराज उनके सगे भाई थे। गज सुकुमाल राजकुमार का शरीर अत्यंत सुंदर व सुकोमल था। एक बार उन्होंने भगवान अरिष्ट नेमी की वाणी सुनी और उन्हें वैराग्य हो गया। उनको सारा संसार नश्वर लगने लगा। उनके माता-पिता व श्रीकृष्ण भगवान ने उन्हें समझाया कि साधना का पथ कठिन है, पर वह नहीं माने। संयम ग्रहण किया और ऐसे उत्कृष्ट मार्ग का पालन किया जो दूसरों के लिए अनुसरणीय बन गया। इस प्रकार उन्होंने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर मुक्ति प्राप्त की। पर्यूषण के इन महापर्वों में हमें भी सच्ची भावना से त्याग व तपस्या कर अपने जीवन को सफल बनाना है।