यमुनानगर। अब गांवों की बहू-बेटियां चूल्हे तक सीमित नहीं रहीं। बहुत सी महिलाओं के हाथ घर-परिवार के साथ पंचायत के विकास की भी बागडोर है। ऐसे ही जिले में कुल 489 में 240 पंचायतों की चौधर महिलाओं के पास हैं, यानी करीब आधी पंचायतों पर महिलाएं सरपंच हैं।
इनमें 47 बारहवीं और 26 ग्रेजुएट या उससे अधिक पढ़ी-लिखी हैं। सभी महिला सरपंचों की औसत आयु 35 वर्ष हैं, जिसके अनुसार उक्त पंचायतों में ज्यादातर पर युवा महिला सरपंच के हाथ गांवों की कमान है। जिले में कुल 489 पंचायतें हैं, जिन पर वर्ष 2022 में चुनाव के दौरान 249 पर पुरुष व 240 पंचायतों पर महिलाओं को ग्रामीणों ने सरपंच बनाया। जिनका करीब डेढ़ वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। संवाद
खंडवार महिला सरपंच
खंड - पंचायत - महिला सरपंच
बिलासपुर - 97 - 47
छछरौली - 81 - 40
जगाधरी - 67 - 33
सरस्वती नगर - 76 - 37
रादौर - 71 - 35
साढौरा - 43 - 21
प्रतापनगर - 54 - 27
कीर्ति रानी संभाल रही सबसे बड़ी पंचायत
बिलासपुर जिले की सबसे बड़ी पंचायत है। इसकी सरपंच कीर्ति रानी है। उन्होंने बताया कि कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी बड़ी पंचायत संभालने का मौका मिलेगा। सरपंच बनते ही परिवार व पंचायत, दोनों के काम देखने के लिए शेड्यूल बनाया। जिसमें सुबह होते ही घर व गांव में काम का सिलसिला शुरू हो जाता है। दोनों कामों के बीच तालमेल बना रखा है, ताकि जिससे घर व पंचायत के प्रति मिली जिम्मेदारी में किसी में भी कमी न रहे।
हर मसला सहमति से सुलझाने के प्रयास
टोडरपुर पंचायत की सरपंच 43 वर्षीय सोनिया ने बताया कि सरपंच बनने के बाद से घर परिवार के साथ पंचायत के कामों का भी जिम्मा है। जिसमें पूरा प्रयास है कि हर काम सही व समय से पूरा कराएं। अभी गांव में मनरेगा के तहत तालाब की खुदाई कार्य चल रहा है। पेयजल के लिए नया बोर कराया है। चार गलियां पक्की कराई हैं और निकासी के लिए नालियों में अंडरग्राउंड पाइप डाले हैं। हर मसले को पंचायत में आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास रहा है।
दोनों जिम्मेदारियां अच्छे से निभाने की कोशिश
पंचायत गोलनपुर की सरपंच 38 वर्षीय लक्ष्मी देवी हैं। उन्होंने बताया कि सरपंच बनने के बाद से परिवार व पंचायत के कार्यों का जिम्मा है, जिसमें दोनों जिम्मेदारियां पूरी तरह निभाने की कोशिश है। अभी तक गांव में करीब पांच गलियां बनवाई, जोहड़ साफ और लाइट व फिरनी की मरम्मत कराई हैं। सौ-सौ गज के प्लॉटों का कब्जा भी दिलाया है। साथ ही निकासी के लिए नालियों में अंडरग्राउंड पाइप डाले गए हैं।