संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शहर के विकास का दावा करने वाला नगर निगम छह साल में अपने लिए नया भवन नहीं बना पाया है। नगर निगम के यह हालात तब हैं, जब भवन के लिए भूमि भी है और इसका टेंडर भी पूर्व में लग चुका है। परंतु नगर निगम कागज के बाद इसे धरातल पर नहीं उतार पाया।
करीब सवा साल से शहर की सरकार नहीं थी। अब नई सरकार बनने के बाद मेयर व पार्षदों के बैठने तक की निगम कार्यालय में जगह नहीं है। पर्याप्त जगह न होने के कारण नगर निगम कार्यालय शहर में तीन स्थानों पर चल रहा है। नगर निगम की सभी कार्यालयों का संयुक्त एक भवन बनाने की योजना है। जिस पर रह-रह कर चर्चा और मंत्रणा भी की जाती है, परंतु जमीनी स्तर पर काम नहीं शुरू हो पाता।नगर निगम कार्यालय बनाने के लिए वर्ष 2018 में घोषणा व शिलान्यास किया गया था। इसके साथ ही 28.28 करोड़ रुपये के टेंडर लग गए थे।
उस समय गोबिंदपुरा में भवन के लिए चिह्नित जमीन विवाद में फंस गई। करीब दो साल इसका विवाद चला और फिर नगर निगम ने यह जमीन छोड़ दी। इसके बाद नया भवन बनाने के लिए जगाधरी अनाज मंडी में भूमि चिह्नित की गई।
भूमि चिह्नित होने के बाद यह मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला गया। इस पर भवन का निर्माण नहीं शुरू हो पाया। ऐसे में शहर की नई सरकार सहित नगर निगम स्टाफ पुराने भवन से ही काम कर रहा है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों को फिर से परेशानी का सामना करना पड़ेगा। चूंकि जगाधरी व यमुनानगर के पुराने भवन में वाहन पार्किंग से लेकर आम लोगों की तो दूर वार्ड पार्षदों के बैठने की पर्याप्त जगह नहीं है।
वर्ष 2018 में पूर्व सीएम मनोहर लाल ने यमुनानगर व जगाधरी, नगर निगम के संयुक्त भवन का निर्माण करवाने की घोषणा की थी। इसके लिए मार्च 2018 में 28.28 करोड़ की अनुमानित लागत पर टेंडर किया गया था। पंचायत भवन के पीछे गोबिंदपुरा में निगम भवन के लिए भूमि चिह्नित की गई थी।
निर्माण के लिए एक सितंबर 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शिलान्यास भी किया था।विवाद के चलते निगम ने जमीन छोड़ दी। अधिकारियों ने जगाधरी अनाज मंडी में डीसी कैंप ऑफिस के सामने भूमि चिह्नित की।
परंतु यहां भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। नगर निगम की इस देखा-दिखाई रवैये में छह वर्ष बीत गए हैं। वहीं, अब शहर की नई सरकार भी चुन ली गई है। इससे गत वर्षों की तरह वार्ड पार्षदों के बैठने का प्रबंध करना बड़ी चुनौती है। चूंकि नगर निगम के पुराने भवन तंग हाल है। पुराने भवन खस्ताहाल भी हो रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों ने पुराने भवन की मरम्मत व रंगाई-पुताई करवाने की तैयारी कर रहे हैं। पहले भी मरम्मत और रंगाई पुताई पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। ऐसा प्रस्ताव नए सदन की बैठक के एजेंडे में भी शामिल है।