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Yamuna Nagar News: बदलते परिवेश में मां की बढ़ी चुनौतियां

Fri, 10 May 2024 04:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। मातृ दिवस को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इस दौरान अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता कार्यक्रम करवाया गया। कार्यक्रम शहर के हिंदू गर्ल्स कॉलेज में हुआ। मुख्यातिथि एवं वक्ता प्राचार्या मोनिका खुराना रहीं। कार्यक्रम का विषय बदलते परिवेश में बच्चों के प्रति बढ़ी माताओं की चुनौतियां व उनका समाधान रहा। इसे लेकर कॉलेज के प्राध्यापिकाओं, स्टाफ सदस्यों व छात्राओं ने चर्चा की।
उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश व जीवन शैली बच्चों व माताओं के लिए अनूठा दबाव व एकाकी भाव पैदा कर रही है। जीवन निजता पर आधारित होता जा रहा है, जिस कारण सभी एक दूसरे से दूर हो रहे हैं। प्राचार्या ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के बीच कामकाजी माताओं के लिए मातृत्व आसान नहीं है। ऐसी महिलाओं को कार्य क्षेत्र में रोजाना नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा सामाजिक, पारिवारिक सहित अन्य परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
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ऐसे में परिवार की देखरेख, बच्चों को संस्कारवान बनाना, उनकी शिक्षा सहित खानपान का ध्यान रखना सभी मां पर निर्भर है। वहीं बदलते परिवेश में माताओं की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई है। बावजूद इसके महिलाएं काम के साथ अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ मोबाइल का बढ़ता उपयोग भी एकाकी जीवन को बढ़ावा दे रहा है। बच्चे परिवार से धीरे धीरे दूर हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों की मनोवैज्ञानिक स्थिति समझकर उनका समाधान करना चाहिए।

मां के लिए एक दिन है कम

छात्रा तमन्ना ने कहा कि मां के प्रेम व ममता का मूल्य कभी नहीं चुकाया जा सकता है। जीवन में मां की भूमिका को सम्मान देने के लिए एक दिन काफी नहीं है। मां के बलिदान, उसके समर्पण, तपस्या के लिए शब्द व हर दिन कम है। मां को जीवन भी कहा गया है। हम मां के सपने पूरे करके ही उन्हें सम्मान व आदर दे सकते हैं।

अच्छे-बुरे की देती हैं समझ

छात्रा विशाखा ने कहा कि मां ही बच्चे की हिम्मत होती है। मां बच्चे को अच्छे बुरे की समझ देती है। मां की शिक्षा ही बच्चे को हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है। मेरी मां मेरी अच्छी मित्र है और मुझे वह अच्छे और बुरे का ज्ञान करवाती है। मां जन्म से बड़ा होने तक साथ रहती है।
मां बनाती हैं बच्चों को मजबूत

डॉ. स्वाति गेरा ने कहा कि मां को इंसान का पहला गुरु कहा गया है। मां ही बच्चों को चलना, उठना, बैठना, बोलना सिखाती है। वहीं मां ही बच्चों में संस्कार के बीज रोपित है। मां की परवरिश के बिना बच्चों का संपूर्ण सामाजिक विकास नहीं हो पाता है। मां ही बच्चों को मजबूत बनाती है। कामकाज में यह सब पिछड़ रहा है, जिसे अपनाने की जरूरत है।

बच्चों की प्रेरणा व हिम्मत

डॉ. पिंकी ने कहा कि मां प्रेरणा और बच्चाें की हिम्मत होती है। बच्चों का मां के प्रति विशेष लगाव होता है। बच्चे मां से अपनी पीड़ा व समस्या आसानी से साझा कर देते हैं। ऐसे में मां ही बच्चों की प्रेरणा व हिम्मत बनती हैं। परंतु बदलते परिवेश में यह स्थान मोबाइल का होता जा रहा है। बच्चे मोबाइल पर समस्या का समाधान ढूंढते हैं। इसमें बदलाव जरूरी है।
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मां की प्रेरणा से बढ़ी आगे
डॉ. सलोनी ने कहा कि मां ने शुरुआत से ही उनका साथ दिया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मां ने बचपन में शिक्षा का महत्व बताया और उच्च तालीम हासिल करने के लिए प्रेरित किया। जिसके चलते वे आज प्राध्यापिका हैं। मां हर परिस्थिति में बच्चों को मजबूत बनाती हैं। परंतु मोबाइल क्रांति से बच्चों के जीवन में बदलाव आया है, जिस पर मंथन जरूरी है।
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