संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्री बालाजी सेवा समिति व नामदेव सेवा समिति की ओर से शहर के कॉलेज रोड पर स्थित श्री बालाजी मंदिर में चल रही कथा लगातार चौथे दिन भी जारी रही। कथावाचक आचार्य अरविंद महाराज ने बताया कि माता पार्वती ने 108 जन्मों की घोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति के रूप में पाया था। एक आदर्श पत्नी की तरह मां पार्वती भगवान शिव की सभी बातों का पालन करती थीं।
उन्होंने बताया कि जब भगवान शिव कुछ बोला करते थे, तब माता पार्वती उसे पूरे ध्यान से सुनती थीं। एक बार भगवान शिव मां पार्वती को ब्रह्म ज्ञान देने के लिए सृष्टि की कथा सुना रहे थे। कथा सुनते सुनते मां पार्वती किन्ही दूसरे विचारों में खो गई। जैसे ही भगवान शिव को इस बात का एहसास हुआ की मां पार्वती उनकी बातों पर ध्यान नहीं दे रही हैं, तब उन्होंने मां पार्वती से पूछा की क्या आप मेरे द्वारा सुनाई जा रही कथा को सुन रही हैं।
मां पार्वती कहीं और खोई हुई थी इसलिए उन्होंने भगवान शिव के सवाल का कोई उत्तर नहीं दिया। कुछ समय बाद जब मां पार्वती का अपने विचारों से ध्यान भंग हुआ और वें अपनी दुनिया में लौटीं तब भगवान शिव ने क्रोधित होते हुए मां पार्वती से कहा कि आपने ब्रह्मज्ञान का अनादर किया है। जब किसी से शिक्षा या ज्ञान लिया जाता है तब ध्यान भंग नहीं होना चाहिए और अगर ऐसा होता है तो ये दंडनीय है। इस अवसर पर पुजारी पुष्पेंद्र मिश्रा, विनोद राणा, नीरज वर्मा बबलू, जितेंद्र कुमार, प्रवीण कुमार आदि मौजूद रहे।