संवाद न्यूज एजेेंसी
यमुनानगर। केंद्र व प्रदेश सरकार पर मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन ने 12 फरवरी को प्रदेश भर में स्कूलों में खाना नहीं बनाने का फैसला लिया है। इसकी लिखित सूचना यूनियन जिला प्रधान नीलम भट्टी व जिला सचिव कविता शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को उनके कार्यालय में दी।
इस मौके पर हड़ताल के मांग पर एक पर्चा भी जारी किया गया। जिसे हर वर्कर तक लेकर जाने के लिए ब्लाॅक स्तर पर बैठक की जाएगी। सीटू जिला संयोजक शरबती ने बताया कि मिड डे मील वर्कर्स की सेवाएं नियमित करने, न्यूनतम वेतन तीस हजार रुपये लागू करने व रिटायरमेंट लाभ देने की मांग का प्रमुखता से जिक्र नोटिस में किया गया है।
इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने एवं मजदूर व परियोजना वर्कर्स विरोधी चार लेबर कोड को रद्द करने की भी मांग की गई है। वर्कर्स को मात्र सात हजार रुपये महीना मानदेय मिलता है। यह मानदेय भी साल में केवल दस महीना का मिलता है। ऊपर से वह भी समय पर नहीं मिलता।
अभी तक केंद्र सरकार का शेयर भी पिछले पांच महीने से नहीं मिला, जोकि हर वर्कर्स का पांच हजार रुपये बनता है। इसी प्रकार दिसंबर महीने का मानदेय भी अभी तक वर्कर्स के बैंक खाता में नहीं आया है। इस मौके पर सुनीता करहेड़ा, सुनीता सुघ,विनोद त्यागी,जोत सिंह उपस्थित रहे।