संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जठलाना कस्बा में महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में श्री हाटकेश्वर नाथ महादेव व श्री शाकुंभरी देवी मंदिर में चल रही आठ दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण कथा का समापन हो गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को आत्ममंथन और सद्कर्म का संदेश दिया गया।
कथा के दौरान आचार्य सचिन कौशिक ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि व्यक्ति को हर कार्य करते समय स्वयं को अपना साक्षी मानना चाहिए, क्योंकि अच्छे या बुरे कर्मों की जिम्मेदारी अंततः उसी की होती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव प्रेम, त्याग और तपस्या के प्रतीक हैं और सच्चे मन से उनकी शरण में आने वाले भक्तों पर वे शीघ्र प्रसन्न होकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
आचार्य ने बताया कि कल्पना का जीवन में विशेष महत्व है और मनुष्य जैसा सोचता व कल्पना करता है, वैसा ही बनता चला जाता है। इसलिए सकारात्मक सोच और श्रेष्ठ कल्पना ही जीवन को सही दिशा देती है। कथा में भगवान शिव को संहारक, वैरागी और योगी बताते हुए कहा गया कि यदि व्यक्ति यह भाव रखे कि उसके हर कर्म का साक्षी वह स्वयं है, तो वह कभी पाप कर्म की ओर अग्रसर नहीं होगा।
उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश के विभिन्न भागों में स्थित इन पवित्र स्थलों पर भगवान शिव ने स्वयं दर्शन दिए थे। इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, पूजन और आराधना से भक्तों के जन्म-जन्मांतर के पाप समाप्त होते हैं और वे भगवान शिव की कृपा के पात्र बनते हैं।