संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की कमी से परेशान मरीजों को जल्द ही राहत मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग अब जिला स्तर पर करीब एक करोड़ रुपये की दवाइयों की खरीद करने जा रहा है। इसके लिए करीब एक करोड़ रुपये की निविदा लगाकर खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
दरअसल जिले में दवाइयों की आपूर्ति की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के वेयरहाउस की होती है। कई बार वेयरहाउस में जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होतीं हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें या तो बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं या फिर इलाज अधूरा छोड़ना पड़ता है। विशेष रूप से टीबी जैसे गंभीर रोगों में दवाइयों की नियमित उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। समय पर दवा न मिलने से न केवल मरीज की सेहत बिगड़ती है, बल्कि बीमारी के और गंभीर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी तरह आंखों की सर्जरी या दंत उपचार के लिए जरूरी सामान की कमी के कारण कई बार मरीजों को ऑपरेशन की तारीख टालनी पड़ती है। इससे मरीजों की तकलीफ बढ़ने के साथ-साथ अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार जब वेयरहाउस में दवाइयां उपलब्ध नहीं होतीं, तब सिविल सर्जन अपने स्तर पर दवाओं की खरीद कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए पहले वेयरहाउस से एनएसी यानि (नॉन अवेलेबिलिटी सर्टिफिकेट) लेना अनिवार्य होता है। एनएसी मिलने के बाद ही स्थानीय स्तर पर दवाइयों की खरीद की अनुमति दी जाती है।
करीब एक करोड़ रुपये से टेंडर के माध्यम से दवाइयों की खरीद की जानी है। खरीद का मुख्य उद्देश्य मरीजों को समय पर इलाज और दवाइयां उपलब्ध कराना है, ताकि किसी को भी दवा के अभाव में परेशान न होना पड़े। समय पर दवाई खरीदने से मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। -डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।