प्राचीन एवं प्रसिद्ध तीर्थ स्थल कपालमोचन में लगने वाले राज्यस्तरीय मेले को सफल बनाने के लिए प्रशासन की ओर से मास्टर प्लान बनाया गया है। मेला अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि इस बार भी मेला में मास्टर प्लान के अनुसार कार्य किए जाएंगे। मेला क्षेत्र को चार सेक्टर में विभाजित किया गया है। इसके अलावा पुलिस चौकी में डीएसपी स्तर के अधिकारी तैनात किए जाएंगे।
मार्शल आर्ट म्यूजियम के समीप पुलिस लाइन बनाई जाएगी। सड़क किनारे व अनाधिकृत स्थान पर किसी को भी दुकान, रेहड़ी, फडी या टैंट आदि लगाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हर सेक्टर में पीएचसी बनाई जाएगी। मेला अधिकारी ने बताया कि सेक्टर एक में 407 दुकानें लगाई जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गैस व लकड़ी के दो स्टाल लगाए जाएंगे। इसमें 1866 टेंट के प्लाट काटे जाएंगे। इसके अलावा तीन मिल्क बूथ बनाए जाएंगे। रागी ढाड़ी व लंगर के लिए 19 प्लाट काटे गए है। प्रदर्शनी में इस बार विभिन्न विभागों के 21 स्टाल लगाए जाएंगे। सेक्टर दो में 110 दुकानें व 89 टेंट लगाए जाएंगे। सेक्टर तीन में 261 दुकानें व 578 टेंट लगाए जाएंगे। इसमें दो प्लाट भंडारे व दो रागी ढाड़ी जत्था के प्लाट होंगे। सेक्टर चार में कर्मिशियल प्लाट काटे गए है। किसानों की जमीन के अधिग्रहण की राशि में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नही की गई है। प्रति एकड़ छ हजार रुपये दिए जाएंगे।
रेडक्रॉस और बालकुंज के लगेंगे दस स्टाल
मेला अधिकारी नरेंद्र सिंह ने बताया कि मेले में पालिथीन पर रोक लगाने के लिए बाल कुंज छछरौली व रेडक्रॉस यमुनानगर की ओर से 10 स्टाल लगाए जाएंगे। जहां मेला में आने वाले दुकानदारों व श्रद्धालुओं को नॉन प्लास्टिक बैग नो लॉस नो प्रॉफिट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। जिस भी दुकानदार के पास पॉलिथीन के बैग पाए गए उसका चालान किया जाएगा। पॉलिथीन यूज करने पर जुर्माने का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि टीमों का गठन कर दुकानदारों की चेकिंग की जाएगी। पॉलिथीन जब्त कर चालान किया जाएगा। उन्होंने धर्मशाला संचालकों को भी पॉलिथीन प्रयोग न करने के लिए जागरूक किया।
लटक रहे बिजली तारों से हादसे का अंदेशा
मेला क्षेत्र में बिजली की झूलती तारें श्रद्धालुओं के लिए परेशानी बन सकती है। भगवान परशुराम मंदिर के निकट आम के पेड़ की टहनियां धरती को छूती चल रही है। वहीं बिजली की तारें भी काफी नीची है। ये पेड़ की टहनी से अटका रखी है। जो आते जाते श्रद्धालुओं के लिए खतरा साबित हो सकती हैं। आसपास के दुकानदारों व लोगों का कहना है कि आए मेले में प्रशासन को ये टहनियां काटने की गुहार लगाई जाती है। लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर जाता ही नहीं। मेला पूर्व इन टहनियों व तारों को यदि ठीक न किया गया तो हादसा हो सकता है।