संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कलेसर गांव अपने रसीले और मीठे आमों के लिए भी नई पहचान बना चुका है। आम उत्पादन के मामले में जिला पूरे हरियाणा में पहले स्थान पर है। यहां के आम न केवल स्वाद और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि हजारों किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार भी बन चुके हैं।
जिले में करीब छह हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है। हर वर्ष लगभग 70 हजार मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। कलेसर, बूड़िया, छछरौली, प्रतापनगर, ताजेवाला और यमुना नदी से सटे क्षेत्रों में सबसे अधिक आम के बाग हैं। अकेले कलेसर गांव में छोटे-बड़े मिलाकर 400 से अधिक बाग हैं, जहां हर साल हजारों क्विंटल आम की पैदावार होती है।
जिले में लंगड़ा, चौसा, दशहरी, अम्रपाली, मल्लिका, तोतापुरी, रामकेला और गुलाब जामुन समेत एक दर्जन से अधिक किस्में पैदा होती हैं। कलेसर की भौगोलिक परिस्थितियां आम की खेती के लिए बेहद अनुकूल हैं।
गांव पहाड़ियों और यमुना नदी के समीप स्थित है। यहां की पथरीली जमीन पर पारंपरिक फसलों की खेती चुनौतीपूर्ण थी। किसानों ने इसे बागवानी के अवसर में बदल दिया। यमुना नदी के कारण भूमि में प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जिससे पेड़ों को पर्याप्त पानी मिलता है और सिंचाई पर खर्च कम होता है।
यही प्राकृतिक वातावरण यहां के आमों की मिठास और गुणवत्ता को भी बढ़ाता है। जिला यमुनानगर के बागवानों की सफलता का प्रमाण हाल ही में पिंजौर स्थित यादवेंद्र गार्डन में आयोजित 33वें हरियाणा मैंगो मेले में भी देखने को मिला।
मेले में दिए गए सात आम रत्न सम्मान में से पांच सम्मान यमुनानगर के बागवानों ने अपने नाम किए। ताजेवाला के अमित मेहता, छछरौली के मयंक, कलेसर के पंकज और रीना रानी तथा बूड़िया के आदित्य जैन को उत्कृष्ट आम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया। आम उत्पादक गुलाब सिंह, बलबीर सिंह, विनीत, भूपेंद्र और अविनाश बताते हैं कि आम की बागवानी अधिक लाभदायक साबित हो रही है।
यमुना नदी से लगते क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी आम की खेती के लिए बेहद उपयुक्त है। पिछले कुछ सालों में ही 200 एकड़ से ज्यादा में आम के नए बाग लगाए गए हैं। विभाग किसानों को नियमित रूप से प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह उपलब्ध करा रहा है।
- डॉ. दिलबाग सिंह लितानी, जिला बागवानी अधिकारी यमुनानगर।