संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। महलांवाली गांव की आबादी 5500 और वोट 3400 है। वहीं डेढ़ हजार भूतपूर्व सैनिक तो वर्तमान में 300 फौज में। ऐसे में इसे फौजियों का गांव भी कहा जाता है। यहां के युवाओं के खून की रग-रग में देश सेवा रमी हुई है। जज्बा इतना कूट-कूट कर भरा हुआ है। हालांकि एक दशक से यहां के युवाओं में विदेश में पढ़ाई व रोजगार के लिए जाने की चाह बढ़ी है, पर अभी भी गांव के काफी युवा सेना में जाना चाहते हैं। ये युवा गांव के दो शहीदों व पूर्व सैनिकों से प्रेरणा लेते हुए खुद को सेना में भर्ती के लिए तैयार करने में जुटे हैं।
महलांवाली गांव में कुछ घरों को छोड़ बाकी सभी से देश को सेना के लिए जवान मिले हैं। जिनमें कई घर तो ऐसे हैं, जहां परिवार की लगातार दो या तीन पीढ़ियां सेना में सेवारत रहीं। महलांवाली दो बलिदानियों का भी गांव हैं। इनमें एक गांव के जनरल जीत सिंह हैं, जो आर्टी रेजिमेंट में थे। वह भारत-पाक युद्ध के दौरान 14 दिसंबर 1971 को शहीद हुए।
इसके बाद गांव से सिपाही सुखविंद्र सिंह, जो सिख रेजिमेंट में थे, वह ऑपरेशन रक्षक के दौरान 10 अक्टूबर 2001 को शहीद हो गए। सुखविंद्र सिंह के नाम पर ही गांव में शहीदी द्वार बनाया गया है। दोनों शहीदों का याद कर आज भी गांव सहित जिले के लोग गर्व महसूस करते हैं।
महलांवाली के पूर्व सैनिक बताते हैं कि पहले गांव के हर युवा में सेना में जाने के उत्साह की वजह उस समय के हालात थे। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद लोगों के पास सेना में भर्ती होने का विकल्प था। सेना में भर्ती के लिए हर कोई दसवीं कर तैयारी में जुट जाता था। गांव में दो से तीन पीढ़ियां ऐसे ही सेना में सेवा के लिए जाती रहीं और वह कई युद्ध व लड़ाइयों का हिस्सा रही। हालांकि गांव में कोई खेल मैदान नहीं है, लेकिन यहां बना सरकारी स्कूल के मैदान में युवा तैयारी करते रहते हैं।
पहले दादा, पिता और खुद भी की देशसेवा
महलांवाली के पूर्व सैनिक जसविंद्र सिंह बताते हैं। उनके स्व. दादा चूहड़ सिंह सुभाष चंद्र बोस की हिंद की सेना में रह कर देश सेवा कर चुके हैं जोकि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सिक्योरिटी गार्ड भी रह चुके। इसी तरह स्व. पिता सूबेदार अमरीक सिंह ने भी 28 साल फौज में रह कर देश सेवा की और खुद जसविंद्र सिंह भी 1999 में सिपाही भर्ती हुए थे और 2016 में हवलदार रिटायर्ड हुए हैं। जसविंद्र ने बताया कि वह सेना में जाने के बाद सांबा, अमृतसर इत्यादि कई जगहों पर पोस्टिंग रही। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अब वे कॉपरेटिव बैंक में गनमैन हैं। जबकि उनके दो बेटे यूके में रहते हैं।