जगाधरी। वर्ष के पहले चंद्रग्रहण के कारण मंगलवार शाम तक जिले के सभी मंदिर बंद रहे। सुबह छह बजकर 20 मिनट पर सूतक लगने के साथ सभी मंदिरों के कपाट बंद हो गए। ग्रहण समाप्ति के बाद शाम छह बजकर 48 मिनट पर मोक्षावधि में कपाट खोले गए। इस दौरान मंदिर परिसर में गंगाजल का छिड़काव कर शुद्धिकरण किया गया और इसके बाद पूजन व आरती हुई।
वहीं, ग्रहण का असर लोगों पर भी देखने को मिला। ज्योतिषाचार्य त्रिलोक महाराज ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में बाहर नहीं निकलना चाहिए। चूंकि इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इसका असर लोगों में देखने को मिला। ग्रहण काल के दौरान अधिकांश लोग घरों में ही रहे और बेहद जरूरी काम से ही बाहर निकले।
विज्ञापन
इस कारण दोपहर में शहर के बाजार व सड़कें खाली नजर आई। ग्रहण मोक्ष के बाद लोग घरों से निकले। इस दौरान लोगों ने घरों में बैठक कर प्रभु नाम का सिमरन किया। हालांकि मंदिर बंद रहे, लेकिन कई लोगों ने मंदिर में बैठक प्रभु का ध्यान किया। ग्रहण पूर्ण होने पर शाम को मंदिरों में गंगाजल से प्रतिमाओं को स्नान करवाया गया।
इसके बाद पूजन और फिर विशेष आरती की गई। कई मंदिरें में भजन संकीर्तन किया गया। वहीं, ग्रहण के बाद मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और भक्तों ने भगवान के समक्ष माथा टेककर भूल-चूक की क्षमा और परिवार के लिए सुख-समृद्धि की माफी मांगी।