विश्रामगृह में लघु सचिवालय व न्यायालय परिसर के निर्माण के लिए अधिगृहीत की गई जमीन के चेक वितरित किए गए। जिन किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई, वे चेक राशि देखकर भड़क गए। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन की कम कीमत दी गई है। किसान इसके खिलाफ कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं।
बिलासपुर-जगाधरी मार्ग पर लगभग बारह एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। शनिवार को अधिगृहीत जमीन के चेक देने के लिए किसानों को बुलाया गया। एसडीएम पूजा चावरिया व कानूनगो जय सिंह और संजीव सैनी की उपस्थिति में प्रति एकड़ 46 लाख 45 हजार दो सौ रुपये के हिसाब से चेक वितरित किए गए।
चेक की राशि को देखकर किसान भड़क गए। गांव चंदा खेड़ी और पीरूवाला के किसान माया राम, विक्रम, जगमाल, सुभाष, बलविंद्र सिंह, रणधीर सिंह, राजीव, मान सिंह, सुरेश पाल, शुभम, गुरदीप, नाम कौर, चंद्रभान, सुखराम, अजमेर सिंह ने बताया कि उनकी जमीन की कीमत करोड़ों में है, जबकि प्रदेश सरकार की ओर से मुआवजे के रूप में कुछ ही लाख रुपये की राशि प्रदान की गई, जो नाकाफी है। ऐसे में किसानों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है।
चार गुना कीमत दे सरकार
किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि अगर सरकार ग्रामीण क्षेत्र में कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण करती है तो उसकी चार गुना कीमत दी जाएगी जबकि शहरी क्षेत्र में दो गुना मूल्य दिया जाएगा लेकिन यहां सरकार ने केवल दो गुना कीमत के चेक दिए हैं।
63 किसानों की भूमि का अधिग्रहण
उपमंडल बिलासपुर में लघु सचिवालय व न्यायालय परिसर के निर्माण के लिए गांव चंदा खेड़ी व पीरूवाला के 63 किसानों की लगभग 12 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है। सरकार की ओर से सभी किसानों को लगभग पांच करोड़ 54 लाख 23 हजार दो सौ रुपये की राशि के चेक वितरित किए गए।