खादी उद्योग को केंद्रीय सरकार द्वारा निजी कंपनियों के हवाले करने के विरोध में यमुनानगर खादी वितरण केंद्र के कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा।
कर्मचारियों ने खादी मिशन हरियाणा के संयोजक शिव प्रसाद शर्मा के नेतृत्व में चरखा कताई कर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि जब तक खादी के कारीगरों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
खादी ग्रामोद्योग कर्मचारी कर्मचारी शनिवार को पूरा दिन खादी ग्रामोद्योग केंद्र को बंद कर केंद्र के सामने धरने पर बैठे रहे। खादी मिशन हरियाणा के जिला संयोजक शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा खादी उद्योग को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले करने से लाखों कारीगर बेरोजगार हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि गांधी ने खादी उद्योग कार्यक्रम को सारे देश में प्रारंभ किया था। उन्होंने ने पूंजीवाद और साम्यवाद के खिलाफ तीसरा विकल्प दुनिया के सामने रखा था। उन्होंने बताया कि ग्रामोद्योग कार्यक्रम से देश के दो लाख एक हजार गांवों में 10.45 लाख कारीगरों को रोजगार मिला था।
उनकी करोड़ों रुपये की राशि खादी ग्रामोद्योग आयोग और प्रांतीय स्टेट बोर्डों में फंसी हैं। जिससे आधे कारीगर बेरोजगार हो गए हैं। इसलिए सर्वोच्च संगठन खादी मिशन ने केंद्रीय सरकार से अनुरोध किया था कि खादी जगत पर जो कर्ज है उसे समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि खादी ग्रामोद्योग संस्थाआें द्वारा देशभर के ग्रामीण क्षेत्राें में एक करोड़ उन्नीस लाख लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।
मौके पर जसमेर सिंह, मदन लाल शर्मा, विरेंद्र सिंह, सुरेश कुमार, रणजीत सिंह, संजीव कुमार, भारत भूषण, जयवीर सिंह, महींपाल सिंह, हरी प्रसाद कर्मचारी मौजूद रहे।
केंद्रीय सरकार ने लागू की खादी मार्क योजना
हाल ही में केंद्रीय सरकार ने खादी मार्क योजना को लागू किया है। जिसके तहत खादी को निजी क्षेत्र के हवाले कर बाजारू खादी बनाया जा रहा है।
उन्होंने सरकार से इस योजना को तुरंत बंद करने की मांग की है। मांगों के लिए कई बार उन्होंने सरकार को ज्ञापन भेजे है। ज्ञापन के बाद के भी कर्मियों की मांगों को नहीं माना गया। खादी मिशन द्वारा केंद्रीय सरकार और खादी ग्राम उद्योग आयोग की ओर से राहत नहीं दी गई।
ग्राम उद्योग संस्थाओं पर 832.65 करोड़ रुपये कर्ज
खादी मिशन की मांग है कि खादी ग्राम उद्योग संस्थाओं पर 832.65 करोड़ रुपये कर्ज है। उसे भी उसी आधार पर मुक्त किया जाए, जिस आधार पर उत्तर प्रदेश के हैंडलूम बुनकरों का 3,884 करोड़ रुपये कर्ज माफ किया गया था। उन्होंने कहा कि संस्थाओं को जो ऋण मिल रहा है, उसके मुकाबले खादी ग्राम उद्योग आयोग ने कई गुणा अधिक कीमत की संपत्ति गिरवी रखी है।
इसलिए जब तक ऋण माफ नहीं होता, तब तक खादी संस्थाओं की मांग अनुसार जितना संस्थाओं के पास ऋण है, उसके बराबर कीमत की रजिस्ट्री बंद रखी जाए।