साढौरा। हिंदू धर्म में सुहाग से जुड़े व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इन उपवासों को रखने से वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहती है। साथ ही दंपती के रिश्तों में मजबूती आती है। सभी उपवास में से करवा चौथ के व्रत को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार यह व्रत और भी महत्वपूर्ण हो गया है, चूंकि सूर्य के दिन सूर्य के नक्षत्र में यह व्रत रखा जाएगा। सुहागिनों द्वारा अपने पति की दीर्घायु एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए करवा चौथ के दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम के समय चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा के दर्शन कर व्रत का पारण किया जाता है। सनातन धर्म में सुहागिनों द्वारा रखे जाने वाला करवा चौथ का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे आमतौर पर शादी-शुदा महिलाएं मनाती हैं। शाम के समय चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा के दर्शन कर व्रत का पारण किया जाता है।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। इस साल 20 अक्तूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। इस दिन व्यतीपात योग के साथ कृत्तिका नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जो व्रत की महत्ता को अधिक बढ़ा रहा है। ऐसे में चांद की पूजा करना और भी लाभदायक होगा, जिससे व्रत के संपूर्ण फल की प्राप्ति होगी। पंडित रामराज कौशिक के अनुसार, इस साल यह पर्व 20 अक्तूबर को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं इस दिन कठिन व्रत का पालन करती हैं और विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से पति को लंबी उम्र और सुरक्षा प्राप्त होती है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि आती है।
करवा चौथ और पूजा का समय-
चतुर्थी तिथि प्रारंभ - 20 अक्टूबर को सुबह 06:46 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - 21 अक्टूबर को सुबह 04:16 बजे
करवा चौथ समय - सुबह 06:25 से शाम 19:54
करवा चौथ पूजा मुहूर्त- शाम 05:46 बजे से शाम 07:02 बजे तक
करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय का समय- शाम 07:54 बजे
करवा चौथ पूजा सामग्री-
मिट्टी या तांबे का करवा और ढक्कन, पान, सींक, कलश, अक्षत, चंदन, फल, पीली मिट्टी, फूल, हल्दी, लकड़ी का आसान, देसी घी, कच्चा दूध, दही, शहद, शक्कर का बूरा, रोली, मौली, मिठाई व छलनी आदि।
करवा चौथ पूजा-विधि
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें खूब सजे संवरे।
2. मंदिर और घर की साफ-सफाई करें
3. सभी देवी-देवताओं की विधि-विधान पूजा करें
4. करवा चौथ व्रत रखने का संकल्प लें
5. संध्या के समय शुभ मुहूर्त में करवा चौथ की व्रत कथा का पाठ करें
6. फिर चंद्रमा की पूजा करें
7. चंद्र दर्शन करने के बाद अर्घ्य दें
8. पति को छलनी से देखकर आरती उतारें
9. फिर पति की ओर से पत्नी को पानी पिलाकर व्रत का पारण किया जाता है।