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कपालमोचन मेला : साधु-संत कल करेंगे शाही स्नान

Mon, 11 Nov 2024 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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बिलासपुर। कपालमोचन मेला आधिकारिक तौर पर 11 नवंबर को शुरू हो जाएगा, लेकिन पंचांग के अनुसार साधु-संत एकादशी पर्व मंगलवार को मना रहे हैं। इसी दिन व्रत रखा जाएगा। इस बार साधु-संतों का शाही स्नान 12 नवंबर को होगा।
भारतीय रक्षा संत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम स्वरूप ब्रह्मचारी ने बताया कि हर साल कपालमोचन में साधु षटदर्शन समाज की ओर से शाही शोभायात्रा निकाली जाती है। सभी साधु संत खेड़ा मंदिर बिलासपुर में पूजा अर्चना के बाद कपालमोचन जाते हैं। साधु सबसे पहले कपालमोचन तीर्थ राज सरोवर में स्नान करते हैं। उसके बाद ऋणमोचन और फिर सूरजकुंड में स्नान करते हैं। साधुओं का पंजाबी कुटिया में ठहराव रहेगा।
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कपालमोचन स्थित क्षत्रिय धर्मशाला में हर साल बाबा बंसी वाले के शिष्य लंगर लगाते हैं। मेला शुरू होने के साथ ही बाबा का लंगर भी शुरू हो जाता है। बाबा के सेवक विनेश अग्रवाल ने बताया कि भंडारे की तैयारियां पूरी हो गई हैं। यूपी व अन्य प्रदेशों से बाबा के सेवक यहां लंगर सेवा करने के लिए पहुंच गए हैं।
श्रद्धालुओं को चौबीस घंटे लंगर की सुविधा मिलेगी। सुबह चाय नाश्ता के बाद दोपहर को कढ़ी चावल, पूरी, आलू व हलवे का प्रसाद बांटा जाएगा। लंगर बांटने के लिए 100 सेवक लगाए जाएंगे। वहीं खाना बनाने के लिए महिलाओं के अलावा रोटियां बनाने की मशीन लगाई जाएगी।
आंवला नवमी पर श्रद्धालुओं ने किया पूजन
तीर्थराज श्री कपालमोचन शुरू होने से पहले रविवार को आंवला नवमी के उपलक्ष्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवरों में स्नान किया। श्रद्धालुओं ने कपालमोचन, ऋणमोचन व सूरजकुंड सरोवर में में स्नान कर आंवला पेड़ की पूजा अर्चना की। कार्तिक मास में आंवला पूजन का विशेष महत्व बताया जाता है। श्रद्धालुओं ने सरोवरों के किनारे दीप प्रज्ज्वलित कर मन्नत मांगी। पंडित सुभाष शर्मा का कहना है कि आज के दिन आंवला पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने से अनेक स्वास्थ्य लाभ मिलता हैं। आंवला के अनेक गुण हैं जो उसे खाने से मिलते है। शास्त्रों में आंवला पूजने का भी काफी वर्णन मिलता है।
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रास्ते में नहीं पीने के पानी की व्यवस्था
कपालमोचन मेले को लेकर श्राइन बोर्ड युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटाआ है। मेले में लाइटिंग को लेकर लापरवाही सामने आ रही है। वहीं जनस्वास्थ्य विभाग ने बिलासपुर से कपालमोचन तक पूरे मार्ग पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की है। मेला शुरू होने के बाद प्रशासन के द्वारा अधिकतर श्रद्धालुओं को चौराही मार्ग पर रोक लिया जाता है। इसके बााद श्रद्धालु पैदल मेला परिसर तक जाते है। छोटा बस स्टैंड से लेकर कपालमोचन उधम सिंह चौक तक कहीं पर भी पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए कोई प्रबंधन नहीं किया गया है। सड़क के दायीं ओर लाइटिंग लगा दी गई. वहीं बायीं ओर अंधेरा रहेगा। दोनों ओर लाइटिंग लगाई जाती थी। यही स्थिति मछरौली मार्ग पर बनी हुई है। यहां पर भी पार्किंग से मेले तक एक ओर लाइटें लगाई है।
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