संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कलेसर जंगल की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए वन विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का सहारा लिया जाएगा। ऐसे में जंगल में होने वाली अवैध कटाई, शिकार और अन्य संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत अलर्ट मिलेगा। इसके लिए आधुनिक कैमरों और सेंसर से लैस निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी।
जो दिन-रात जंगल की गतिविधियों पर नजर रखेगी। इतना ही नहीं कलेसर वन क्षेत्र में 42 फीट ऊंचे टावर स्थापित किए जा रहे हैं। इन टावरों पर हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे, जो करीब 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को कवर करेंगे। खास बात यह है कि इन कैमरों को एआई तकनीक से जोड़ा गया है। जैसे ही सिस्टम किसी संदिग्ध गतिविधि जैसे पेड़ों की कटाई, असामान्य मानवीय हलचल या रात के समय अनधिकृत प्रवेश को पहचानता है, तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज दिया जाएगा। अब तक वन कर्मियों को गश्त के दौरान या स्थानीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करनी पड़ती थी, जिससे कई बार देरी हो जाती थी। नई प्रणाली लागू होने के बाद सूचना तुरंत उपलब्ध होगी और टीम समय रहते मौके पर पहुंच सकेगी। इससे अवैध कटाई और शिकार की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। कलेसर क्षेत्र को लंबे समय से वन्यजीवों की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। यहां हिरण, सांभर, नीलगाय सहित अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। अवैध गतिविधियों के कारण इनकी सुरक्षा को खतरा बना रहता है। एआई आधारित निगरानी प्रणाली से न केवल पेड़ों की सुरक्षा होगी, बल्कि वन्यजीवों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। इससे उनके संरक्षण के लिए बेहतर योजना बनाना संभव होगा। कलेसर को प्रदेश के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में भी गिना जाता है। बेहतर सुरक्षा व्यवस्था से पर्यटकों का विश्वास बढ़ेगा। जंगल सुरक्षित रहेगा तो इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वन विभाग का मानना है कि तकनीक और सतर्कता के इस समन्वय से कलेसर जंगल की सुरक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।
जंगल की सुरक्षा होगी मजबूत : निरीक्षक
वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक लीलूराम का कहना है कि यह परियोजना प्रदेश में वन सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आधुनिक तकनीक के उपयोग से जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। भविष्य में इस मॉडल को अन्य वन क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना बनाई जा सकती है।