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ट्रैक्टर-ट्रॉली बनाम जाम = बढ़ता हादसों का ग्राफ

Thu, 17 Dec 2015 12:03 AM IST
यमुनानगर/ ब्यूरो
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फोग सीजन की दस्तक के साथ हादसों का ग्राफ भी बढ़ने लगा है। बीते वर्षों की तरह सड़क दुघर्टनाओं में इस बार भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बड़ी वजह बन रही हैं। कारण कुछ ओर नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा इसका स्थाई तौर पर कोई समाधान (तोड़) न निकाल पाना है।
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धुंध या अनियंत्रित होने पर पलटने या वाहनों से टकराने से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां जाम के साथ हादसों का सबब बन रही हैं, किंतु प्रशासनिक अधिकारी ढाई कोस ही चल पाए हैं, चूंकि अभी भी अधिकतर बिना इंडिकेटर की ट्रॉलियों के पीछे नंबर प्लेट व रिफ्लेक्टर नहीं हैं, बावजूद इसके वह ओवरलोड होकर सरपट दौड़ रही हैं।

बता दें कि यमुनानगर में दो राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-73 व 73ए अन्य कई राज्यमार्ग गुजर रहे हैं। इन समेत शहरी सड़कों से राजस्थान, पंजाब, यूपी, हिमाचल, उत्तराखंड व चंडीगढ़ सहित आसपास के जिलों का ट्रैफिक निकलता है। ट्रैफिक के लगातार बढ़ते दबाव के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉलियां यातायात व्यवस्था को बिगाड़ने का काम कर रही हैं, क्योंकि गन्ने, प्लाई, लक्कड़, भूसा व अन्य सामान को लाने-ले जाने को इनका इस्तेमाल बहुतायत होने लगा है।
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फेरे कम कर डीजल और समय की बचत के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को क्षमता से अधिक सामान लोड किया जा रहा है। ऐसा नजारा सड़कों पर आम देखा जा सकता है और बीते दिनों हुई सड़क दुर्घटनाएं इसका उदाहरण हैं।

पांच हादसों में पांच लोगों की मौत, पांच हुए घायल:
सप्ताहभर में चार हादसों में ही पांच व्यक्तियों की मौत व पांच लोग घायल हो गए। बीते मंगलवार भी शहर के सबसे व्यस्तम मार्ग पर बने मधु चौक पर लकड़ी से ऑवरलोड ट्रॉली अनियंत्रित होकर कार पर पलट गई व जाम लग गया। इस दौरान ट्रैक्टर व कार चालक बाल-बाल बच गए। इससे अलावा बीते दो सप्ताह में गांव औरंगाबाद के समीप स्टेट हाईवे (कुरुक्षेत्र-सहारनपुर) व बुड़िया चौक के समीप एनएच-73ए (जगाधरी-पावंटा) समेत कई स्थानों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के पलटने के बाद जाम की दिक्कत का सामना करना पड़ा।


7 दिसंबर- बाडीमाजरा रोड पर सोमवार देर शाम ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से बाइक सवार बाडीमाजरा के प्रॉपर्टी डीलर जगप्रीत सिंह (33) की मौत हो गई।

7 दिसंबर- जगाधरी-पाबनी रोड पर सोमवार रात गांव शाहकमेशपुर के समीप अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार गांव मंधार के प्रवेश (21) व सुखविंद्र (22) की मौत हो गई। मृतकों में एक ट्रक ड्राइवर व दूसरा हेल्पर था, तब बताया गया था कि अज्ञात वाहन ट्रैक्टर-ट्रॉली था।

12 दिसंबर- रादौर त्रिवेणी चौक पर सड़क पार करते समय नाचरौन निवासी रणबीर की अज्ञात वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई।

13 दिसंबर- गांव तिगरी में रविवार को राखी से ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से एक्टिवा सवार मंडौली का जितेंद्र (25) गंभीर घायल हुआ, जिसे पीजीआई रेफर किया।

14 दिसंबर- एनएच-73ए के बल्लेवाला क्रेशर जोन में सोमवार को धुंध में अनियंत्रित होकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटी। इसके नीचे दबने से गांव चुहड़पुर के कुलवंत (35) की मौत हो गई, जबकि उसके साथी श्याम, नरेश व मामू घायल हो गए।

इन पर कैसे लगेगा रिफ्लेक्टर?
कई ट्रॉलियों के स्पोटर (डाले) हटाकर उनमें दो-तीन फुट पीछे तक प्लाई पत्ता, भूसा व अन्य भारी सामान लोड कर दिया जाता है। जबकि दोनों ओर भी ट्रॉली के तीन-तीन फुट तक सामान बांध दिया जाता है। इससे छह फुट चौड़ी ट्रॉली 12 फुट तक सड़क पर जगह घेर कर चलती हैं, जिससे उन पर रिफ्लेक्टर लगे भी हों, तो दिखते नहीं हैं। जबकि आगे ट्रॉली को लेकर चल रहे ट्रैक्टर की चौड़ाई पांच फुट होती है।

इससे चालक को पीछे से कौन-सा वाहन या राहगीर आ-जा रहा है, कुछ स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है। ट्रैक्टर चालक के जरा-सी साइड लेने पर भी पीछे चल रहा वाहन चालक के दुघर्टनाग्रस्त होने की संभावना रहती है। जबकि बिन रिफ्लेक्टर के ओवरलोड ट्रॉली धुंध में सड़क हादसों को न्यौता देती नजर आती है। चूंकि ट्रॉली में ब्रेक नहीं होते हैं। ऐसे में अगर वह ओवरलोड है, तो ट्रैक्टर की ब्रेक लगते वह ट्रॉली के जोरदार दबाव से घूम जाता है। अधिकतर मामलों में ट्रॉली के पलटने व अन्य वाहन से टकराने के पीछे यही वजह रहती है। इससे जाम की दिक्कत के साथ जानमाल की भी हानि होती है।

ट्रैक्टर-ट्रॉली व भारी वाहनों की एंट्री का हो अलग समय:
रोड सेफ्टी आर्गेनाइजेशन के जिला महासचिव अवतार सिंह चुघ का कहना है कि वैसे तो ट्रैक्टर-ट्रॉलियां कृषि पर्पस के लिए इस्तेमाल होनी चाहिएं। जिले से पांच राज्यों व स्थानीय का ट्रैफिक का दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में सामान लेकर जा रहे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही का टाइम बाउंड होना चाहिए। प्रशासन ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत सभी भारी वाहनों की एंट्री का समय रात ग्यारह से सुबह छह बजे तक निर्धारित करे, जबकि अन्य 17 घंटे छोटे वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तय हों। इससे कुछ हद तक जाम की दिक्कत के साथ हादसों के ग्राफ को भी कम किया जा सकता है।

इन बिंदुओं पर भी अमल जरूरी:-
- ट्रॉली में करीब छह फुट ऊंचाई तक सामान लोड हो, अधिक पर ऑवरलोड मान चालान कार्रवाई की जाए।
- फोग सीजन में ट्रॉलियों के चारों ओर रिफ्लेक्टर व रिफलेक्टर टेप लगाई जाए।
- ट्रैक्टर-ट्रॉली को निर्धारित रफ्तार से ही चलाया जाए।
- शहर में ओवरलोड वाहनों को रोकने को प्रवेश मार्गों पर बेरिकेटिंग हो सकती है, जिसे एंट्री के समय पर ही खोला जाए।
- ट्रॉली के पीछे भी ट्रैक्टर नंबर अंकित हो, ताकि नियम उल्लंघन पर कार्रवाई हो सके।
- ट्रॉली बेचने वाली कंपनी द्वारा ही उसके चारों ओर रिफ्लेक्टर लगाए जा सकते हैं।

वर्जन
रिफ्लेक्टर लगाने का अभियान जारी है। वाहनों की संख्या काफी है, ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत सभी वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगवा दिए जाएंगे।
निर्मल सिंह, प्रभारी, यातायात थाना।

वर्जन
ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों सहित अन्य वाहनों के खिलाफ अभियान चल रहा है। ऐसे वाहनों के रोजाना चालान किए जा रहे हैं। बीती रात भी करीब 15 वाहन पकड़े हैं। पूरा प्रयास है कि ओवरलोडिंग पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
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कुशल कटारिया, सचिव, आरटीए।
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