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Yamuna Nagar News: प्रसाद और पवित्र छड़ी निशान चढ़ाकर मांगी मन्नत

Mon, 28 Sep 2026 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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गोगा मेड़ी पर माथा टेकने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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रादौर। प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक आठ दिवसीय जाहरवीर गोगा मेड़ी मेला रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। छुट्टी का दिन होने के कारण मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने गोगा जी महाराज की मेड़ी पर प्रसाद और पवित्र छड़ी निशान चढ़ाकर मन्नतें मांगीं। मेले में आए लोगों ने विभिन्न प्रकार के झूलों का आनंद लिया।
मेड़ी के पुजारी अनिल कश्यप और बाबू राम कश्यप ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइनें बनाई गई हैं। उन्होंने बताया कि मेले में करीब 300 वर्षों से आयोजन होता आ रहा है और उनकी पांचवीं पीढ़ी मेड़ी में सेवा कर रही है। मेले से जुड़ी मान्यता बताते हुए पुजारियों ने कहा कि एक बार थाना प्रभारी ने मेला दो दिन पहले समाप्त करवाने का प्रयास किया था। इसके बाद उन्हें हर जगह सांप दिखाई देने लगे।
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उन्होंने गोगा जी महाराज से माफी मांगकर अगले वर्ष दो दिन अतिरिक्त मेला लगवाने का वादा किया था। इसके बाद अगले वर्ष दस दिवसीय मेला आयोजित हुआ और तब से मेला लगातार आयोजित किया जा रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष शालू मेहता ने बताया कि मेले में शानदार लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। नगर पालिका सचिव सुरेंद्र मलिक ने बताया कि लोगों के मनोरंजन के लिए रागिनी तथा बच्चों के लिए गोरिल्ला, भेड़िया सहित विभिन्न पशुओं की पोशाकों का इंतजाम किया गया है।
थाना प्रभारी राजेश राणा ने बताया कि सुरक्षा के लिए मेले में नाके लगाए गए हैं और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। महिला पुलिसकर्मी भी विशेष ड्यूटी देंगी। रात के समय सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाएगी। आवारागर्दी करने वालों पर कार्रवाई होगी। श्रद्धालुओं को लाइन में लगाकर दर्शन और प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था की गई है।
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हिंदू वीरों पर 786 लिखी चादर नहीं चढ़ती : पुजारी
मेड़ी के पुजारी अनिल कश्यप और बाबू राम कश्यप ने बताया कि मेले में कुछ वर्ष पहले 786 लिखी चादर चढ़ाने का काम किया गया था। हिंदू वीरों पर 786 लिखी चादर नहीं चढ़ती, इसलिए जाहरवीर गोगा मेड़ी में 786 नंबर की चादर प्रतिबंध है। मीठी खील के प्रसाद पर लगभग पिछले चार वर्षों से प्रतिबंध लगाया है। मीठी खील का प्रसाद बंद करने का मुख्य कारण है कि इन पर कीड़े मकोड़े अधिक संख्या में आते हैं। श्रद्धालुओं के पैरों के नीचे आकर कीड़े मकोड़े मर जाते हैं। इससे पुण्य कमाने आए श्रद्धालु अनजाने में पाप के भागी बन जाते हैं।

गोगा मेड़ी पर माथा टेकने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद

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